‘सऊदी अरब के कब्जे में है मक्का’, हूतियों के मुखिया ने MBS पर बोला सीधा हमला, तुर्की-पाक‍िस्‍तान को चेतावनी

सना/रियाद: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों के शीर्ष नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने सऊदी अरब के खिलाफ अब तक का सबसे तीखा बोला है। उन्होंने कहा है कि ‘मक्का पर सऊदी अरब ने कब्जा कर रखा है।’ आपको बता दें कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर पिछले महीने मक्का समझौता किया था। इसके बाद हूतियों और सऊदी के बीच जंग छिड़ गई है। इसके जवाब में अल-हूती ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पवित्र शहर मक्का किसी ‘सऊदी रियासत’ का हिस्सा नहीं है बल्कि यह पूरी दुनिया के मुसलमानों की साझी धरोहर है।

सऊदी किंगडम पर तीखे शब्दों में बोलते हुए हूती प्रमुख ने दावा किया कि मक्का और पवित्र काबा इस वक्त ‘सऊदी कब्जे’ में हैं और उनका संगठन सऊदी शासकों की तुलना में इन पवित्र स्थलों के प्रति कहीं ज्यादा वफादार है। रियाद में जारी सैन्य बैठकों और सुरक्षा गठबंधनों के बीच हूती प्रमुख के आए इस बयान ने पूरे इस्लामिक जगत और पश्चिम एशिया की राजनीति में नई खलबली मचा दी है।

हूतियों के मुखिया अब्दुल-मलिक ने क्या कहा?

अब्दुल-मलिक ने जो वीडियो बयान जारी किया है उसमें वो कह रहे हैं ‘हम मक्का को सऊदी के अधीन नहीं मानते हैं। हम इसे एक इस्लामिक धरोहर मानते हैं जो हर एक मुसलमान का है और इसमें कोई शर्त नहीं है। सऊदी अरब को यहां कोई विशेषाधिकार नहीं है और वो मक्का के पीछे छिप नहीं सकते हैं जब वो मुस्लिमों के साथ अलग अलग झगड़ों पर झड़प करेंगे। अपने राजनीतिक सिस्टम के तहत सऊदी ने अमेरिका, इजरायल, जायोनिस्ट और ब्रिटेन के साथ संबंध बनाए।’

उन्होंने आगे कहा ‘हम (हूती) मक्का और काबा को लेकर ज्यादा वफादार हैं और इसकी सुरक्षा के ऐसे गठबंधनों से ज्यादा तैयार हैं।’ अब्दुल-मलिक वीडियो में कह रहे हैं ‘मक्का को हथियाने के बाद सऊदी ने यहां कई घिनौने अपराध किए हैं और वो इतिहास में दर्ज है। लोग किताबों में उसके बारे में पढ़ सकते हैं। फिर से देखिए मक्का पर कब्जा करने के बाद सऊदी ने क्या सब किए हैं। उन्होंने यहां पर नरसंहार किए हैं। सारी बातें किताबों में दर्ज हैं। हमारा मानना है कि सऊदी ने घिनौने तरीके से मक्का का शोषण किया है और ये पवित्रा इस्लामिक जगहों के लिए हानिकारक है।’

तुर्की और पाकिस्तान को सीधी चेतावनी

सैयद अब्दुल मलिक बद्र अल-दीन अल-हूती ने अपने भाषण में तुर्की और पाकिस्तान से अपील की कि वे यमन के खिलाफ सऊदी अरब की आक्रामकता में शामिल न हों और न ही यमनी लोगों के खिलाफ युद्ध और नाकेबंदी में क्षेत्रीय ताकतों को शामिल करने की कोशिशों का हिस्सा बनें। उन्होंने तुर्की और पाकिस्तान से कहा कि वे स्थिति का सावधानीपूर्वक आकलन करें और ऐसी सत्ता को सैन्य या सुरक्षा सेवाएं देने से बचें जो अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है और यमनी लोगों की जान और उनके जायज अधिकारों की कीमत पर राजनीतिक समर्थन और लाभ हासिल करने की कोशिश कर रही है।

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