दिल्ली/भोपाल, मध्य प्रदेश में बिजली विभाग की लापरवाही और जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। बिजली के खंभे गिरने, जर्जर तारों के टूटने और करंट लगने की घटनाओं में अब तक 230 लोगों की अकाल मौत हो चुकी है। चिंताजनक पहलू यह है कि बीते दो वर्षों के भीतर इंसानी मौतें 24.3% बढ़ गईं हैं।
आंधी-तूफान के दौरान पुराने खंभों के टूटने और मानसून के समय निचले इलाकों में फैले करंट के कारण हादसे बढ़ रहे हैं। मेंटेनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद हादसों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है।
एमपी में बिजली के खंभे गिरने और तार टूटने के कारण इंसानों और जानवरों की मौतों के मामलों को देखें तो बीते दो सालों में 83 लोगों की मौतें हुई हैं। जबकि इस प्रकार के हादसों में दो सालों में 147 पशुओं की जानें गईं हैं।
देश भर में करीब 5 हजार मौतें हुईं
देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में सिर के ऊपर से गुजर रही जर्जर हाईटेंशन लाइनें और बिजली के खंभे अब सीधे मौत का पर्याय बन चुके हैं। केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए आधिकारिक और चौकाने वाले आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि बीते दो वर्षों (2024-2026) के दौरान बिजली के तारों के टूटने और खंभों के गिरने से कुल 4,930 जान-माल का नुकसान हुआ है, जिनमें 1,249 निर्दोष इंसान और 3,681 बेजुबान पशु जिंदा भस्म हो गए।