भोपाल। रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, भिक्षुक, निराश्रित, महिलाओं और बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश जीआरपी का ‘आपरेशन हमदर्द’ प्रभावी साबित हो रहा है।
अभियान के पहले दो दिनों में ही प्रदेश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले 235 लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। इनमें 1 जुलाई को 150 और 2 जुलाई को शाम छह बजे तक 85 लोगों का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया।
जुटाई जा रही जानकारी
अभियान के दौरान जीआरपी टीम ने स्टेशन परिसर में रहने वाले भिक्षुकों, निराश्रित व्यक्तियों, नाबालिग बच्चों और महिलाओं से संपर्क कर उनकी पूरी जानकारी जुटाई। इनमें से लगभग 40 प्रतिशत लोगों को रैन बसेरों में भेजा गया, जबकि अन्य जरूरतमंदों को संबंधित संस्थाओं और विभागों के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई गई।
ये होगा फायदा
मध्य प्रदेश इस तरह का व्यापक डिजिटल सर्वे अभियान शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे रेलवे स्टेशनों पर चोरी, अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों का पुनर्वास भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
रेलवे स्टेशनों पर बड़ी संख्या में फ्लोटिंग पापुलेशन (अस्थाई आबादी) रहती है। ऐसे लोगों का सही रिकार्ड तैयार करने और अपराधों पर नियंत्रण के लिए यह अभियान अब हर वर्ष जुलाई और जनवरी में चलाया जाएगा।
अपराधियों पर नजर रखना होगा आसान
स्टेशन के आसपास सक्रिय अपराधियों पर नजर रखना आसान होगा, वहीं बेसहारा बुजुर्गों, अनाथ बच्चों, महिलाओं और मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा।- राजाबाबू सिंह एडीजी (रेलवे)