भोपाल, नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निर्मल एवं अविरल मां नर्मदा मिशन (नमन मिशन) बनाएगी। मप्र सोसाइटी पंजीकरण एक्ट के तहत स्वायत्त संस्था के रूप में इसका पंजीयन होगा।
मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे। साधारण सभा में 19 विभागों के मंत्री और 10 विशेषज्ञ सदस्य रहेंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारिणी समिति काम करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया।
नर्मदा के लिए पहले से गठित मंत्रिमंडल समिति, इंटर डिपार्टमेंट कमेटी और स्टेट मॉनिटरिंग सेल का मिशन में विलय होगा। इसके अधीन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) बनेगी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीआईएस और डेटा एनालिटिक्स से नदी के स्वास्थ्य का नियमित वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी।
मिशन को सालाना 100 करोड़ रुपए का अनुदान मिलेगा। नदी किनारे प्लांटेशन के लिए कैम्पा फंड से 100 करोड़ और अन्य कार्यों के लिए अगले पांच वर्षों में राज्य बजट से 100 करोड़ रुपए मिलेंगे। सीएसआर, केंद्रीय सहायता और पीपीपी मॉडल से भी राशि जुटाई जाएगी।
2031 तक लाड़ली बहना सहित तीन योजनाएं जारी रहेंगी
लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को 2031 तक जारी रखने की मंजूरी मिली है। लाड़ली बहना के लिए पांच साल में 1,14,365 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। लाड़ली लक्ष्मी के लिए 16,326.47 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं, इसके 50.99 लाख लाभार्थी हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 2,137.65 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। इसमें पहले प्रसव पर 5 हजार और दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपए मिलते हैं।
हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर : चार योजनाओं के लिए पांच साल में 11,835.35 करोड़ रुपए मंजूर हुए। इसमें उप स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल उन्नयन, आधुनिक उपकरण और 71 हजार आशा कार्यकर्ताओं सहित 5200 पर्यवेक्षकों की प्रोत्साहन राशि भी है।
कृषि : कृषि शोध और शैक्षणिक विकास पर 2026 से 2031 तक 870.16 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय की पेंशन, ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय की ब्लॉक ग्रांट और अनुसंधान ढांचा शामिल है।
साइंस रिसर्च के लिए 734 करोड़ रुपए : वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण के प्रोजेक्ट के लिए 734 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। इसमें साइंस ऑन व्हील्स और विज्ञान मंथन यात्रा भी शामिल हैं।
एमपीआरडीसी में 35 नए पद, 4.12 करोड़ सालाना खर्च : एमपीआरडीसी में 35 नए पद मंजूर हुए हैं। पहले से मौजूद सात पद 2031 तक बने रहेंगे। ये पहले से स्वीकृत 288 पदों के अतिरिक्त हैं। इससे सालाना 4.12 करोड़ रुपए खर्च बढ़ेगा, जिसे एमपीआरडीसी अपनी आय से वहन करेगा। नए पदों की योग्यता और वेतनमान एमडी तय करेंगे। जरूरत पर संचालक मंडल पदनाम बदल सकेगा।
कंसाना से बोले सीएम
लोगों को क्यों नहीं बता रहे कि शुगर मिल की जमीन कहीं नहीं जा रही
कैलारस शुगर मिल जमीन मामला कैबिनेट बैठक में उठा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना से कहा कि लोगों को बताएं कि शुगर मिल की जगह उसी के लिए रिजर्व है और बाकी जमीन पर एमएसएमई क्लस्टर बनेंगे। बंद मिल की जमीन एमएसएमई विभाग को सौंपने और कम मूल्यांकन को लेकर विवाद है।
आरोप है कि 450 करोड़ रुपए कीमत की जमीन 61 करोड़ रुपए में ट्रांसफर की गई। जौरा विधायक पंकज उपाध्याय और शक्कर कारखाना बचाओ समिति के नेतृत्व में किसान-मजदूर मिल के पुनरुद्धार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।