मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जिला अदालत में जजों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते न्याय की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालात यह हैं कि यहां लंबित मुकदमों का आंकड़ा 1.50 लाख के करीब पहुंच गया है। हर एक अदालत पर हजारों मुकदमों का भारी बोझ है, जिसके चलते फरियादियों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
जजों के 46 पद खाली, मुकदमों का अंबार
- जिला अदालत में इंसाफ की आस लेकर हर रोज हजारों फरियादी पहुंचते हैं, लेकिन यहां जजों के स्वीकृत 112 पदों में से वर्तमान में मात्र 66 जज ही पदस्थ हैं। 46 पद खाली होने के कारण पेंडिंग मामलों की संख्या 1,49,998 तक पहुंच गई है।
- जजों की कमी के कारण एक कोर्ट को औसतन 4 से 6 हजार मामलों का भार उठाना पड़ रहा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालतों की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां एक दिन में लगभग 100 मुकदमों पर सुनवाई करनी पड़ती है। पेंडेंसी का आलम यह है कि 20 फीसदी से अधिक मामले 5 से 10 साल या उससे भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं।
- हैरानी की बात यह है कि यदि शासन स्तर पर खाली पड़े 46 पदों को भर भी दिया जाए, तो अदालत परिसर में नए जजों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं है। वर्तमान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के कोर्टरूम को मिलाकर परिसर में कुल 60 कोर्टरूम हैं।
नए जज आए तो बैठने के लिए कोर्टरूम नहीं
कठघरे का अभाव, लॉबी में रखी जा रहीं अहम फाइलें
- बुनियादी सुविधाओं का हाल यह है कि विधिक सेवा प्राधिकरण की बिल्डिंग में चल रहे 10 कोर्टरूम इतने छोटे हैं कि वहां गवाहों और आरोपियों के बयान दर्ज करने के लिए कठघरा (विटनेस बॉक्स) तक नहीं है।
- मुकदमों की फाइलें रखने वाली अलमारियां कोर्टरूम में न आ पाने के कारण बाहर लॉबी में रखी गई हैं। ऐसे में केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुरानी जेल की जमीन पर नई कोर्ट का प्रोजेक्ट भी अटका
- सभी अदालतों, जजों के चेंबर और प्रशासनिक शाखाओं को एक ही छत के नीचे लाने के लिए हाई कोर्ट ने पुरानी जेल की जमीन पर एक मल्टी-स्टोरी जिला न्यायालय परिसर बनाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, इसी जमीन पर हाउसिंग बोर्ड ने भी आवासीय कॉलोनी बनाने का प्रस्ताव रख दिया।
- दोनों प्रस्ताव आने के बाद जेल विभाग ने जगह की कमी का हवाला देते हुए गांधीनगर की नई जेल से 31 कैदियों को वापस पुरानी जेल में शिफ्ट कर दिया। इस खींचतान के चलते नई कोर्ट बिल्डिंग का प्रोजेक्ट आगे ही नहीं बढ़ सका है।