मप्र में PWD मुख्य अभियंताओं के खाली पदों पर पदोन्नति टली; विभागीय जांच और गोपनीय रिपोर्ट की होगी कड़ी स्क्रूटनी

भोपाल। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में अधीक्षण अभियंता (एसई) से मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) के पदों पर होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। गुरुवार को प्रस्तावित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक स्थगित कर दी गई।

अब अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, पिछले पांच वर्षों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) और लंबित विभागीय जांचों की विस्तृत स्क्रूटनी के बाद नई तारीख तय की जाएगी।

विभाग में मुख्य अभियंता के 23 स्वीकृत पद हैं, जबकि 21 अधीक्षण अभियंताओं की पदोन्नति पर विचार होना है। फिलहाल पदोन्नति लंबित रहने के कारण अधिकांश वरिष्ठ पद प्रभार के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं।

फोल्डरों की संख्या ज्यादा, नहीं हो पा रही जांच

सूत्रों के अनुसार, डीपीसी के समक्ष रखे जाने वाले फोल्डरों की संख्या अधिक होने और प्रत्येक अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड, विभागीय जांच तथा वर्ष 2020 से 2024 तक की सीआर का विस्तृत परीक्षण किए जाने के कारण बैठक टालनी पड़ी।

गहन जांच जारी

कमेटी यह भी जांच रही है कि अधिकारियों को मिली उत्कृष्ट ग्रेडिंग उचित कारणों और उपलब्धियों के आधार पर दी गई है या नहीं। नियमों के अनुसार डीपीसी कमेटी के पास रिकॉर्ड और प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन में परिवर्तन करने का भी अधिकार है। इसी वजह से प्रत्येक फोल्डर की गहन जांच की जा रही है।

लंबित जांचों के कारण रुका काम

सीनियर क्लास-1 से सुपर क्लास-1 पदों के लिए होने वाली इस पदोन्नति प्रक्रिया में सबसे ज्यादा समय फोल्डर्स की जांच में लग रहा है। विभागीय नियमों के अनुसार, विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के समक्ष संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चल रही सभी लंबित विभागीय जांचों की पूरी जानकारी रखी जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही, हर अधिकारी के मूल सीआर (कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट) फोल्डर से पिछले पांच वर्षों की प्रविष्टियों का कड़ाई से मिलान किया जा रहा है।

5 साल की सीआर और उत्कृष्टता पर विशेष फोकस

कमेटी मुख्य रूप से वर्ष 2020 से वर्ष 2024 तक के पिछले पांच सालों के सीआर रिकॉर्ड खंगाल रही है। इस पूरी स्क्रूटनी में दो बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
सीआर ग्रेडिंग की सत्यता: फोल्डर में दर्ज की गई सभी जानकारियां पूरी तरह सही और प्रमाणित हैं या नहीं।
उत्कृष्टता का ठोस कारण: जिन अधिकारियों को ‘उत्कृष्ट’ ग्रेडिंग मिली है, उनके फोल्डर में स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि उन्हें यह ग्रेडिंग किस ठोस आधार या विशेष कार्य के लिए दी गई है। कमेटी बिना किसी ठोस कारण के लिख दी गई उत्कृष्ट ग्रेडिंग को गहराई से देख रही है।

डीपीसी कमेटी के पास है विशेष पावर

नियमों के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय डीपीसी कमेटी के पास यह विशेष विवेकाधिकार (पावर) होता है कि वह अधिकारी के रिकॉर्ड और परफॉर्मेंस को देखते हुए उसका 1 नंबर घटा या बढ़ा सकती है। यही वजह है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर एक फोल्डर की बारीकी से जांच की जा रही है।

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