रघु ठाकुर बोले-PM ने 13 साल में नहीं की पत्रकार-वार्ता:बिलासपुर में राहुल गांधी को दी नसीहत, कहा- गैरजरूरी सवालों में देश को न उलझाएं

बिलासपुर (छत्तीसगढ़), बिलासपुर में लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) के संस्थापक और समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर बयान दिया। उन्होंने ‘जेन-जी’ जैसे विदेशी शब्दों के इस्तेमाल और आंदोलनों में गाली-गलौज की भाषा पर भी आपत्ति जताई।

रघु ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी जल्दी में हैं। उम्मीद है कि वे देश को गैरजरूरी सवालों की ओर नहीं ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी शिक्षा और बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का अच्छा माहौल बना हुआ है। इन मुद्दों पर गंभीरता से बात होनी चाहिए।

जन आंदोलनों की दशा और दिशा पर ठाकुर ने कहा कि आजकल आंदोलनों के एजेंडे पर विदेशी प्रभाव और पूंजीवाद हावी है। उन्होंने चिंता जताई कि जन आंदोलनों और विमर्श में विदेशी सहयोग और नैरेटिव का प्रभाव बढ़ रहा है।

उन्होंने कांग्रेस से तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह कांग्रेस अंग्रेजों के दौर में भारत में बनी थी, उसी तरह आज ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अमेरिका में पैदा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा आंदोलन स्वतःस्फूर्त होने के बजाय प्रायोजित नजर आते हैं। उनके मुताबिक ऐसे आंदोलनों के लक्ष्य सीमित होते हैं, जिससे व्यवस्था पर व्यापक असर नहीं पड़ता।

बापू से लेकर जेपी तक किसी आंदोलन में गालियां नहीं दी गईं

रघु ठाकुर ने कहा कि जनआंदोलन में प्रधानमंत्री या किसी अन्य व्यक्ति को गाली देना और अपशब्दों का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, “मेरे पिताजी ने महात्मा गांधी के साथ आंदोलन किया और लाठियां खाईं, लेकिन गालियां नहीं दीं। मैंने डॉ. लोहिया के साथ काम किया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में जेल गया, लेकिन कभी किसी को गाली नहीं दी।”

उन्होंने कहा कि गाली में हिंसा होती है और आंदोलन की भाषा तार्किक व संयमित होनी चाहिए।

जन आंदोलन के 5 बुनियादी तत्व बताए

ठाकुर ने कहा कि किसी भी सच्चे जन आंदोलन में पांच मूल तत्व होने चाहिए।

  • आंदोलन स्वतःस्फूर्त होना चाहिए।
  • आंदोलन विदेशी फंडिंग या कॉर्पोरेट के बजाय जनता के अपने साधनों से चलना चाहिए।
  • इसका उद्देश्य सिर्फ तत्काल लाभ नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए।
  • गाली-गलौज, पथराव और तोड़फोड़ जैसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
  • अभिव्यक्ति की शैली तार्किक, संयमित और लोकतांत्रिक होनी चाहिए।

‘जेन-जी’ और ‘अल्फा’ की जगह स्कूल-कॉलेज के छात्र लिखें

ठाकुर ने मीडिया के माध्यम से अपील की कि ‘जेन-जी’ और ‘अल्फा’ जैसे शब्दों की जगह स्कूल के छात्र और कॉलेज के छात्र लिखा जाए। उन्होंने कहा कि हाल ही में स्कूल के छात्रों ने आंदोलन किया, जो सफल रहा। इस दौरान किसी को गाली नहीं दी गई, बल्कि छात्रों ने तर्कों के साथ अपनी बात रखी।

देश के हालात चिंताजनक, जनता की बात सुनी जानी चाहिए

रघु ठाकुर ने कहा कि देश की स्थिति चिंताजनक है और समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरी तरह नहीं निभा रही हैं और जनता की बात नहीं सुनी जा रही है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारों को जनता की बात संवेदनशीलता से सुनकर उसका समाधान करना चाहिए। सरकार और जनता के बीच संवाद टूटना चिंता की बात है।

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