सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच जल संसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। देवास जिले में भिड़ा नदी पर निर्माणाधीन सिरोंज बैराज पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सका और क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए।
मुख्य अभियंता की रिपोर्ट में निर्माण कार्य में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने के बाद विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) और दो उपयंत्रियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं निर्माण एजेंसी को भी नियमानुसार क्षतिग्रस्त बैराज अपने खर्च पर दोबारा तैयार करना होगा।
पहली बारिश में ढही सुरक्षा दीवार
हरदा-पिप्पलिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम होशियारपुर और मकड़िया के बीच 2.18 करोड़ रुपये की लागत से सिरोंज बैराज का निर्माण किया जा रहा है। 9 जुलाई को हुई तेज बारिश के दौरान बैराज की सुरक्षा दीवार (सिंगवॉल) ढह गई और डाउनस्ट्रीम हिस्से की बैक फिलिंग भी बह गई। घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
जांच में सामने आईं तीन बड़ी तकनीकी खामियां
मुख्य अभियंता की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि बैराज में जल निकासी के लिए आवश्यक संख्या में आरसीसी पाइप नहीं लगाए गए। इसके अलावा बैराज की ऊंचाई निर्धारित मानकों से अधिक रखी गई, जिससे प्राकृतिक जल निकासी बाधित हो गई। पानी का दबाव बढ़ने पर ओवरफ्लो हुआ और सुरक्षा दीवार टूट गई। रिपोर्ट में इन खामियों को हादसे की प्रमुख वजह माना गया है।
तीन अधिकारियों पर गिरी गाज
रिपोर्ट के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी नेहा दुबे तथा उपयंत्री जितेंद्र पाटिल और रोहित सोनी को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में तीनों को भोपाल स्थित मुख्य अभियंता, चंबल-बेतवा कछार जल संसाधन विभाग कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
निर्माण एजेंसी को खुद करना होगा सुधार
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य अभी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड में है। ऐसे में निर्माण एजेंसी कटारे एंड कंपनी को अपने खर्च पर क्षतिग्रस्त बैराज की मरम्मत और पुनर्निर्माण करना होगा। विभाग पूरे मामले की निगरानी कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।