थलपति विजय के को-स्‍टार जय ने कबूला इस्लाम, हिंदू धर्म छोड़ने पर कहा- मंदिरों में मेरा अपमान हुआ

एक समय था, जब जय को साउथ फिल्मों के प्रॉमिसिंग स्टार्स में शुमार किया जाता था। माना जाता था कि वह लंबी रेस का घोड़ा साबित होंगे। उन्होंने पूर्व एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय (सी जोसेफ विजय) के साथ 2002 में फिल्म ‘बगावती’ से एक्टिंग डेब्यू किया था, जिसमें वह एक्टर के छोटे भाई बने थे, पर करियर कुछ खास नहीं चला। हालांकि, जय धर्म परिवर्तन और इस्लाम कबूल करने को लेकर काफी चर्चा में जरूर रहे। जय ने हाल ही दिए इंटरव्यू में इस्लाम कबूलने और धर्म परिवर्तन पर बात की। उन्होंने बताया कि आखिर किस कारण इस्लाम कबूलने को मजबूर हुए। जय ने यह भी दावा किया कि उनकी कुछ मंदिरों में बेइज्जती भी की गई।

जय ने ‘गलाटा प्लस’ को दिए इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने साल 2011 से ही इस्लाम फॉलो करना शुरू कर दिया था और इस धर्म परिवर्तन का उनके करियर से कोई लेना-देना नहीं है। जय ने यह भी बताया कि इस्लाम कबूलने के बाद भी उन्होंने अभी तक अपना नाम नहीं बदला है, पर अब इस बारे में सोच रहे हैं और अजीज जय नाम अपनाने के बारे में सोच रहे हैं।

जय का मंदिरों में हुआ अपमान, बताया मस्जिद का अनुभव

जय ने बताया, ‘मैंने सबरीमाला के लिए माला पहनी थी, और फिर एक साल तक मैंने यीशु की माला पहनी और व्रत रखा। मैंने सभी देवी-देवताओं का अनुसरण किया, यह सोचकर कि सब ठीक है। लेकिन एक समय ऐसा आया, जब मंदिरों में मुझे अपमानित होना पड़ा। कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे मैं संतुष्ट नहीं था। ऐसी घटनाएं और बातें होती रहीं। फिर, एक बार जब मैं एक मस्जिद गया, तो मैंने देखा कि सभी लोग लाइन में खड़े होकर प्रार्थना कर रहे थे। यह मेरा पहला अनुभव था।’

बताया मस्जिद में किस बात ने झकझोरा

जय ने आगे बताया, ‘सभी जानते थे कि मैं एक एक्टर हूं, लेकिन मस्जिद के अंदर किसी ने मुझसे बात नहीं की। बाहर आने के बाद ही उन्होंने मुझसे बात की, और वह भी बहुत विनम्रता से। किसी ने फोटो के लिए नहीं कहा। तो मुझे लगा कि क्या यहां कोई समानता है? क्या वो सभी को समान मानते हैं? इस बात ने मुझे बहुत झकझोर दिया।’

‘इस्लाम फॉलो करने के बाद मेरा स्वभाव भी बदलने लगा’

जय आगे बोले, ‘मस्जिद के अंदर जाने के बाद, वो केवल ईश्वर को ही सर्वोच्च मानते हैं। चाहे कोई भी सेलिब्रिटी हो, उन्हें बड़ा नहीं समझा जाता। वो हमें अपनी इच्छाएं मांगने की पूरी आजादी देते हैं। प्रार्थना करते समय कोई हमें धक्का नहीं देता या जाने के लिए नहीं कहता। हम जितनी देर चाहें प्रार्थना कर सकते हैं। यह योग जैसा अनुभव था। इस्लाम फॉलो करने के बाद, मेरे स्वभाव में भी बदलाव आने लगा।’

नाम बदलकर रखना चाहते हैं अज़ीज़ जय

वहीं, साल 2019 में जय ने इस्लाम कबूलने को लेकर कहा था, ‘मुझे इस्लाम में अटूट आस्था हो गई है। घर पर सब खुश हैं और कहते हैं कि जो बच्चा किसी भी देवता की पूजा नहीं करता था, वह अब कम से कम किसी देवता की पूजा तो कर रहा है। धर्म परिवर्तन करने के बावजूद मैंने अभी तक अपना नाम नहीं बदला है। मैं सोच रहा हूं कि क्या मैं अपना नाम बदलकर अज़ीज़ जय रख लूं।’


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