भोपाल, प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने साफ कहा है कि जो अधीक्षक रात में छात्रावास में नहीं रुकेंगे, उन्हें अधीक्षक पद से हटाया जाएगा। सरकार छात्रावासों में ऐसी व्यवस्था लागू कर रही है, जिसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं रहेगी।
5228 शिक्षक बने बैठे हैं अधीक्षक
मंत्री विजय शाह ने बताया कि प्रदेश में इस समय 5 हजार 228 अधीक्षक ऐसे हैं, जो मूल रूप से शिक्षक हैं। कई अधीक्षक न तो नियमित पढ़ाते हैं और न ही छात्रावास में पूरा समय देते हैं, जिससे बच्चों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह स्थिति बच्चों के साथ अन्याय है। इसी को सुधारने के लिए सरकार नई अधीक्षक कैडर व्यवस्था ला रही है।
योजना के तहत अगले तीन से चार वर्षों में हर साल करीब 1200 फुल-टाइम अधीक्षक नियुक्त किए जाएंगे। इसके साथ ही जो शिक्षक वर्तमान में अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें वापस उनके मूल शैक्षणिक कार्य में लगाया जाएगा। आगामी शिक्षा सत्र से पहले करीब तीन हजार अधीक्षकों की व्यवस्था आउटसोर्सिंग के जरिए की जाएगी, ताकि छात्रावासों में अधीक्षक की कोई कमी न रहे।
अधीक्षक को हॉस्टल में बच्चों के साथ रात रुकना जरूरी छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मंत्री ने कहा कि अब हर छात्रावास में अधीक्षक का क्वार्टर अनिवार्य होगा और अधीक्षक को रात में बच्चों के साथ ही रहना पड़ेगा। जो अधीक्षक ऐसा नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही संभाग स्तर पर महिला अधिकारियों की विशेष जांच टीम बनाई गई है, जो छात्रावासों में जाकर व्यवस्थाओं की जांच करेगी। यह देखा जाएगा कि बच्चे समय पर आते-जाते हैं या नहीं और छात्रावास में किसी तरह की कमी तो नहीं है।
बायोमेट्रिक मशीनें और सीसीटीवी लगेंगे सरकार ने तकनीक के माध्यम से निगरानी को भी मजबूत करने का निर्णय लिया है। ट्राइबल डिपार्टमेंट के लगभग 2500 छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक या थंब इम्प्रेशन मशीनें लगाई जाएंगी। चाहे छात्रावास पांच सीटर हो या पचास या पांच सौ सीटर, एक भी छात्रावास इस व्यवस्था से बाहर नहीं रहेगा। कौन कब आया और कब गया, इसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके अलावा छात्राओं को दिए जाने वाले भोजन की पूरी थाली की फोटो प्रतिदिन भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा, ताकि भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर निगरानी रखी जा सके।
यूनियन कार्बाइड वाली जगह महंगी, उसका निर्णय सीएम ही करेंगे विजय शाह गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री भी हैं। उनसे पत्रकारों ने पूछा कि भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन पर क्या किया जाएगा? इसके जवाब में मंत्री विजय शाह ने कहा कि अनेक कारणों से इतने वर्षों से कचरा नहीं हट रहा था, हमारी सरकार और मुख्यमंत्री ने विशेष प्रयास किए। कचरा हटाने के लिए न सिर्फ पैसे की व्यवस्था की, बल्कि हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट से अनुमति कराई। कचरे का निष्पादन करना मोहन सरकार की बड़ी उपलब्धि है।
जहां तक सवाल उस जमीन का है वह महंगी जमीन है मुख्यमंत्री कोई निर्णय करेंगे। वो मेरा विषय नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक मार्गदर्शन कमेटी बनाई है। गैस राहत के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है। गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान कार्ड की अनुमति की। अब उनका बडे़ सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराया जाएगा।
सुरक्षा गार्ड का होगा पुलिस वेरिफिकेशन मंत्री विजय शाह ने भरोसा दिलाया कि आने वाले शिक्षण सत्र से एक भी कर्मचारी बिना पुलिस वेरिफिकेशन के नहीं रखा जाएगा। सुरक्षा गार्डों और अन्य कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित की जाएगी। यदि कहीं भी सुरक्षा व्यवस्था में कमी पाई जाती है, तो उसकी तत्काल समीक्षा कर सुधार किया जाएगा।
जनजातीय ब्लॉक में हाईटेक स्कूल खुलेंगे
जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के व्यापक विस्तार की दिशा में सरकार ने अगले तीन वर्षों की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि विद्यालय की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय भी खोले जाएंगे। स्कूलों में स्मार्ट क्लास, लैब और लाइब्रेरी सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा, ताकि जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
जनजातीय सांस्कृतिक पहचान दिलाने बनेंगे कला भवन जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने के लिए 88 जनजातीय विकासखंडों में कला भवन बनाए जाएंगे। डिंडोरी जिले की गोंड पेंटिंग को जीआई टैग मिल चुका है, जबकि भील जनजाति की गलशन माला, पिथौरा चित्रशैली, झाबुआ आदिवासी गुड़िया और गोंड जनजाति के वाद्य यंत्रों सहित सात उत्पादों की जीआई टैग प्रक्रिया चल रही है।
जनजातीय महिलाओं की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए पचमढ़ी, मांडू, कान्हा-किसली, पेंच और बांधवगढ़ में जनजातीय महिला कैफेटेरिया बनाए जा रहे हैं, जिनका संचालन स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत लाखों जनजातीय परिवारों को आवास, बिजली, सड़क, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा गया है। जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट, वन धन विकास केंद्र और छात्रावास भवनों का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है।
मंत्री विजय शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जनजातीय छात्राएं सुरक्षित माहौल में पढ़ें, आगे बढ़ें और समाज की मुख्यधारा में मजबूती से खड़ी हों। छात्रावासों की सख्त निगरानी और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार इसी दिशा में उठाया गया निर्णायक कदम है।