25 साल में पहली बार हुआ ऐसा, शेयर बाजार में लगातार 8 हफ्ते गिरावट, आगे कैसी रहेगी चाल?

नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट आई है। भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में पिछले 25 साल में यह सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। अमेरिका में 10-साल के बॉन्ड यील्ड में जबरदस्त उछाल के कारण गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। यह यील्ड ग्लोबल एसेट की कीमत तय करने का मुख्य आधार है। इस उछाल ने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की करेंसी में हलचल मचा दी और निवेशकों को डॉलर-आधारित इंस्ट्रूमेंट्स में सुरक्षा तलाशने के लिए प्रेरित किया।

कारोबार को दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,200 अंक तक गिर गया था जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की निफ्टी भी 22,300 अंक के नीचे आ गया था। अंत में सेंसेक्स 570.59 अंक या 0.79% गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 199 अंक या 0.9% की गिरावट आई और यह 22,422 पर बंद हुआ।

आगे का हाल

मौजूदा बिकवाली ने छह साल पहले कोविड के कारण लगे लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में देखी गई सात हफ्ते की गिरावट को पीछे छोड़ दिया है। पिछले 8 हफ्तों में शेयर बाजार में करीब 9% गिरावट आई है। इससे पहले 2001 में 12 फरवरी से 12 अप्रैल तक लगातार नौ हफ्ते शेयर बाजार में गिरावट आई थी। इस बार 10 अगस्त से शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ था जो आठवें हफ्ते भी जारी रहा।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च के हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, "भारतीय इक्विटी पर निकट भविष्य में दबाव बने रहने की संभावना है क्योंकि ग्लोबल बॉन्ड में भारी गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी और छह महीनों में सबसे ज्यादा विदेशी बिकवाली का असर सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।"

रुपये में गिरावट

अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी यील्ड ने 2007 के अपने उच्चतम स्तर को तोड़कर 5.3% का स्तर छू लिया है, जो अप्रैल 2002 के बाद सबसे ज्यादा है, जबकि 30-साल का यील्ड 5.6% पर है। सितंबर में, विदेशी फंड्स ने 44,013 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अगस्त में, उन्होंने 7,532 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। मार्च में ईरान संकट के चरम पर उन्होंने 1.2 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

डॉलर के मजबूत होने से गुरुवार को रुपया आधा प्रतिशत कमजोर हुआ और एशिया महाद्वीप में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी रहा। इंडोनेशियाई रुपिया, थाई बाट और जापानी येन में भी 0.35% से 0.45% के बीच गिरावट आई। SBI सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट सनी अग्रवाल ने कहा कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बेचना जारी रखा।

निवेशकों की परेशानी

इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज ने कहा कि निवेशक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और उसके कारण डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट से भी परेशान हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल लिक्विडिटी मुख्य जोखिम बने हुए हैं। हालांकि, लगातार कमजोरी से कुछ खास शेयरों में निवेश के मौके बन सकते हैं क्योंकि पोजिशनिंग और वैल्यूएशन में बदलाव हो रहा है।

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