ईरान पर अमेरिका के बैन से भारत को बड़ा झटका; चावल, चाय और दवा निर्यात पर मंडराया संकट

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए नया अभियान शुरू किया है। अमेरिकी प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाली विदेशी कंपनियों और देशों पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्हें अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से बाहर किया जा सकता है। इसका असर भारत के ईरान को होने वाले निर्यात पर भी पड़ने की आशंका है। खास तौर पर चावल, चाय और फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका के नए कदम के बाद ईरान ने भी किसी ऐसे देश के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो अमेरिका के नेतृत्व वाले इस आर्थिक अभियान में शामिल होता है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे ईरान के खिलाफ अभूतपूर्व वित्तीय अभियान बताया है।

60 कंपनियों पर लगाया बैन

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सोमवार को ईरान से जुड़े 60 कंपनियों, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने इन्हें ईरानी शासन की गतिविधियों को मदद पहुंचाने वाला बताया है। प्रतिबंध सूची में भारत की 4 कंपनियां और 3 कारोबारी शामिल हैं।

भारत-ईरान व्यापार में भारी गिरावट

भारत ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार पहले ही 2019 के बाद काफी कम हो चुका है। अमेरिका की ओर से 2019 में ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में मिली छूट खत्म किए जाने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिकी बाजार और वित्तीय प्रणाली तक अपनी पहुंच को जोखिम में डालने से बचने के लिए ईरान से कच्चे तेल का आयात लगभग बंद कर दिया था।

भारत-ईरान के बीच कितना व्यापार?

  • कॉमर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2018-19 में 17.03 अरब डॉलर था, जो 2019-20 में घटकर 4.77 अरब डॉलर रह गया। यानी एक साल में व्यापार में करीब 72 फीसदी की गिरावट आई।
  • अब वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 1.63 अरब डॉलर रह गया है। इसमें भारत का निर्यात 90 फीसदी से ज्यादा है।
  • मौजूदा समय में भारत से ईरान को मुख्य रूप से वे सामान भेजे जाते हैं, जिन्हें मानवीय आधार पर प्रतिबंधों से छूट मिली हुई है।

चावल निर्यात पर सबसे बड़ा खतरा

अमेरिका की नई कार्रवाई से भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान को भारत के चावल, चाय और दवाओं का कारोबार हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर दुबई के रास्ते होता रहा है। खास तौर पर बासमती चावल का निर्यात प्रभावित हो सकता है। भारत ने 2026 की पहली छमाही में ईरान को करीब 38.3 करोड़ डॉलर का चावल निर्यात किया है।

भारतीय निर्यातकों के लिए समस्या इसलिए बढ़ सकती है क्योंकि इस कारोबार का बड़ा हिस्सा दुबई के जरिए होता है। अगर ईरान से जुड़े व्यापार और वित्तीय लेनदेन पर संयुक्त अरब अमीरात में भी सख्ती बढ़ती है, तो भारतीय कारोबारियों के लिए भुगतान और शिपमेंट की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।

फार्मा और चाय कारोबार पर भी असर

चावल के अलावा भारत से ईरान को चाय और फार्मास्युटिकल उत्पादों का भी निर्यात होता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में उन कंपनियों के आने का खतरा है, जो ईरान के साथ वित्तीय लेनदेन या कारोबार को सुविधाजनक बनाती हैं।

ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए ईरान से भुगतान हासिल करना, बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल करना और सामान की आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ईरानी तेल खरीद भी बनी चिंता

भारत और ईरान के बीच व्यापार केवल निर्यात तक सीमित नहीं है। ईरानी कच्चा तेल भी दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारत ने 2026 की पहली छमाही में ईरान से करीब 70.7 करोड़ डॉलर का कच्चा तेल आयात किया। ये आयात पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान युद्धविराम के बीच अमेरिका की ओर से दी गई एक छूट के तहत संभव हुए थे। ईरान से भारत आने वाले अन्य उत्पादों में सेब, बादाम, खजूर, एलपीजी और कीवी जैसे सामान भी शामिल रहे हैं।

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