ताशकंद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार-रविवार को उज्बेकिस्तान का दौरा किया है। उनकी यात्रा ने एक बार फिर भारत और मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान के सदियों पुराने रिश्तों पर ध्यान खींचा है। उज्बेक राजधानी ताशकंद भारतीयों के नया नाम नहीं है। इसी शहर में भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 के युद्ध के बाद शांति संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस शहर से एक बुरी याद भी जुड़ी है क्योंकि भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन ताशकंद में ही हुआ था। ताशकंद के अलावा भी उज्बेकिस्तान का एक ऐसा शहर है, जिसका भारत से रिश्ता मुगल काल से जुड़ा है। ये पहाड़ों में बसा शहर अंदीजान है।
अवाजदवायस में अपने एक लेख में अदिति भादुरी ने अंदीजान को भारत और उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों का सबसे अच्छा उदाहरण और पुल कहा है। अंदीजान उज्बेकिस्तान के तिएन शान और पामीर पहाड़ों की तलहटी में फरगना घाटी के बीच बसा है। इसी शहर में बाबर जन्म थे, जिन्होंने लोधी को हराकर दिल्ली में मुगल काल की नींव रखी और क्षेत्र में एक नया इतिहास बना।
अंदीजान में बाबर का जन्म
फरगना के शासक उमर शेख मिर्जा के घर जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर का जन्म 1483 में हुआ। साल 1494 में उमर मिर्जा की मौत हो गई, जब बाबर की उम्र 12 साल थी। अपने पिता के बाद वे फरगना के शासक बने लेकिन जल्द ही उनकी गद्दी चली गई। समरकंद पर कब्जे की नाकाम कोशिश के बाद बाबर काबुल में बसे और आखिर हिंदुस्तान की तरफ जाने का इरादा करते हुए सेना तैयार की।
साल 1526 में पानीपत में बाबर की इब्राहिम लोदी से लड़ाई हुई, जो उस वक्त दिल्ली पर शासन कर रहे थे। लोदी को हराने के बाद बाबर ने मुगल साम्राज्य की नींव रखी, जिसने अगले तीन सदियों तक भारत (मौजूदा समय से पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत) के बड़े हिस्से पर बहुत मजबूती से शासन किया। बाबर इस जीत के बाद सिर्फ चार साल जिंदा रहे लेकिन वह एक ताकतवर साम्राज्य की नींव डाल चुके थे।
उज्बेकिस्तान के हीरो बाबर
उज्बेकिस्तान में बाबर को एक राष्ट्रीय नायक के तौर पर सम्मान दिया जाता है। उनका बेहतरीन सैन्य रणनीतिकार और कवि के रूप में बहुत सम्मान है। देश की साहित्यिक और ऐतिहासिक सोच में उनकी कृति ‘बाबरनामा’ का अहम स्थान है। बाबर का जन्मदिन (14 फरवरी) उज्बेकिस्तान में मनाया जाता है। अंदीजान में बाबर के बचपन का घर और बगीचा किसी ‘तीर्थ-स्थल’ जैसा है।
बाबर का गृहनगर अब कोई मध्ययुगीन बस्ती नहीं बल्कि 6,50,000 लोगों की आबादी वाला एक चहल-पहल भरा प्रांतीय शहर और अंदीजान प्रांत की राजधानी है। यहां साक्षरता दर काफी ऊंची है और तेजी से विनिर्माण क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही शहर के सेंट्रल स्क्वेयर में घोड़े पर सवार बाबर की एक विशाल प्रतिमा लगी है।
बाबर के नाम पर म्यूजियम
शहर से सात किलोमीटर दूर बोगिशामोल की पहाड़ी पर बाबर हाउस म्यूजियम और पार्क है। यहीं बाबर बड़े हुए और कहा जाता है कि उन्हें यहां के बगीचों में घूमना और पहाड़ों के एकांत में कविताएं लिखना पसंद था। बाबरनामा में उन्होंने बताया है कि मातृभूमि को हमेशा के लिए छोड़ने से पहले वह विदाई लेने आखिरी बार यहां आए थे।
यह जगह आज लाखों उज्बेक लोगों के लिए एक पवित्र जगह है और विजिटर्स के लिए एक पॉपुलर अट्रैक्शन है। म्यूजियम में बाबर की जिंदगी और कामों से जुड़ी दुर्लभ चीजें रखी हुई हैं। इनमें सिक्के, हथियार, कपड़े, बर्तन और बाबरनामा की कॉपी शामिल हैं। यहां के लोग बाबर और उनकी विरासत के बारे में गर्व से बात करते हैं।
बाबर का सांकेतिक मकबरा
साल 1993 में पहाड़ी की चोटी एक सिंबॉलिक मकबरा बनाया गया। यह एक मार्बल वॉल्ट के अंदर है, जिसमें बाबर की जिंदगी से जुड़ी तीन जगहों से इकट्ठा की गई मिट्टी है। इसमें बाबर का जन्मस्थान अंदीजान, मौत का शहर आगरा और और काबुल की मिट्टी है, जहां इस शासक के अवशेषों को ले जाकर फिर से दफनाया गया था।
अंदीजान से भारत का रिश्ता सिर्फ भारत तक नहीं है। ये प्रांत हालिया वर्षों में गुजरात से तेजी से जुड़ा है। इससे दोनों इलाकों के बीच आर्थिक, एजुकेशनल और कल्चरल जुड़ाव के मौके खुले हैं। भारत के लोग काफी संख्या में अंदीजान में हैं और कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इसमें शिक्षा, व्यापार से लेकर नौकरी तक शामिल है।