30 की उम्र के बाद ज्यादातर लोग अपने करियर, परिवार और फाइनेंशियल जिम्मेदारियों में ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं। इसका असर उनकी लाइफस्टाइल पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों में कमी, अनहेल्दी डाइट और लगातार बढ़ता स्ट्रेस जैसी आदतें धीरे-धीरे कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, कम उम्र में हार्ट हेल्थ खराब होने के पीछे ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, स्मोकिंग की आदत जैसे कारक भी मुख्य भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आप कम उम्र से ही हार्ट के प्रति सजग हो जाए और समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव कर लें। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि एक्सरसाइज में कार्डियो से आप हार्ट हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं।
कार्डियो एक्सरसाइज हार्ट के लिए कैसे काम करती है?
क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार कार्डियो यानी एरोबिक एक्सरसाइज में ऐसी एक्टिविटीज शामिल होती हैं जिनसे हार्ट रेट और ब्रीदिंग कुछ समय के लिए बढ़ती है। इसमें ब्रिस्क वॉकिंग, साइकिलिंग, जॉगिंग, स्विमिंग, डांसिंग और कुछ स्पोर्ट्स इसके उदाहरण हैं। जब आप कार्डियो करते हैं, तो हार्ट मसल्स शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ज्यादा एक्टिव होकर काम करते हैं। रेगुलर एक्सरसाइज से कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस बेहतर हो सकती है, यानी शरीर फिजिकल एक्टिविटी के दौरान ऑक्सीजन का इस्तेमाल ज्यादा असरदार तरीकों से कर पाता है।हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी को हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के कम रिस्क से जोड़ा गया है। हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मॉडरेट फिजिकल एक्टिविटी करने से कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को फायदा मिल सकता है और एक्टिविटी बढ़ाने पर एक्स्ट्रा फायदे मिल सकते हैं। यानी कार्डियो का फायदा सिर्फ कैलोरी बर्न करने तक लिमिटेड नहीं है। यह ओवरऑल कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का हिस्सा है।
रेगुलर कार्डियो से बीपी और कोलेस्ट्रॉल पर क्या असर पड़ता है?
हाई ब्लड प्रेशर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल दोनों कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।सीडीसी के अनुसार रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकती है। एक्सरसाइज के बाद भी कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर कम रह सकता है और रेगुलर एक्टिविटी लंबे समय में ब्लड प्रेशर मैनेजमेंट का हिस्सा बन सकती है। कोलेस्ट्रॉल की बात करें तो फिजिकल एक्टिविटी लिपिड प्रोफाइल पर भी पॉजिटिव असर डाल सकती है। रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी कोलेस्ट्रॉल लेवल को बेहतर करने में मदद कर सकती है।हालांकि अगर किसी व्यक्ति को पहले से हाइपरटेंशन या हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो केवल एक्सरसाइज को दवाओं का विकल्प नहीं चुनना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा, डाइट, नींद और एक्सरसाइज सभी को साथ लेकर चल सकता है।
क्या एक्सरसाइज से डायबिटीज और मोटापे का जोखिम कम हो सकता है?
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार एक्सरसाइज जैसे कार्डियो का फायदा सिर्फ हार्ट तक सीमित नहीं है। फिजिकल एक्टिविटी शरीर को ग्लूकोज इस्तेमाल करने में मदद करती है और वजन नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे टाइप 2 डायबिटीज जोखिम होने और वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।अगर आप एक्सरसाइज के साथ डाइट में लगातार जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेते हैं तो इससे वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। बेहतर परिणाम के लिए रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी के साथ बैलेंस्ड डाइट, पर्याप्त नींद संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।WHO के अनुसार 18-64 वर्ष के वयस्कों को सप्ताह में:
- 150-300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि, या
- 75-150 मिनट की जोरदार तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि, या
- दोनों का मिलाजुला कर करना चाहिए।
इसके अलावा सप्ताह में कम से कम 2 दिन की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियों की सलाह दी गई है। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति प्रतिदिन 30 मिनट तेज चाल से चलता है, तो वह प्रति सप्ताह लगभग 210 मिनट की मध्यम गतिविधि कर सकता है। लेकिन रोज व्यायाम करना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति सप्ताह में 5 दिन 30 मिनट तेज चलना और 2 दिन शक्ति प्रशिक्षण कर सकता है।30 की उम्र के बाद कार्डियो को रूटीन में शामिल करना हार्ट हेल्थ के लिए एक अच्छी आदत हो सकती है। रेगुलर एरोबिक एक्टिविटी कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस बेहतर करने के साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और वजन जैसे कार्डियोवैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स को मैनेज करने में मदद कर सकती है। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि हर 30+ व्यक्ति को रोज कार्डियो करना ही चाहिए। हर उम्र के लोगों के लिए अलग-अलग गाइडलाइन हैं। फिलहाल कार्डियो के लिए वॉकिंग, साइकलिंग, स्विमिंग और रनिंग में से कोई भी विकल्प चुना जा सकता है। सबसे जरूरी है कि वह एक्टिविटी आपकी फिटनेस और हेल्थ कंडीशन के अनुकूल हो और आप उसे लंबे समय तक रेगुलर रख सकें।