ओआगाडोगू: पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो के राष्ट्रपति इब्राहिम ट्राओरे ने देश के कट्टरपंथियों को कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि उनके देश में कभी भी शरिया कानून नहीं लागू किया जाएगा। सैन्य तख्तापलट कर सत्ता हासिल करने वाले ट्राओरे ने कहा कि वह भले ही मुसलमान है, लेकिन उनके शासन में सभी धर्मों के लोगों को पूरी आजादी होगी। एक सार्वजनिक संबोधन में उन्होंने कहा कि बुर्किना फासो में कोई भी धर्म देश से बड़ा नहीं होगा और देश में शरिया कानून नहीं लागू किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब में शरिया कानून की पढ़ाई कर रहे देश के लोगों पर नाराजगी जताई। ट्राओरे ने कहा कि ऐसे छात्रों को तकनीकी कौशल सीखने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे देश का विकास हो सके। ट्राओरे ने साफ कहा कि सऊदी अरब में शरिया सीखने गए लोगों को वहीं रहना चाहिए और उन्हें वापस आने की जरूरत नहीं है।
कौन है इब्राहिम ट्राओरे?
इब्राहिम दुनिया को दुनिया के सबसे युवा सैन्य तानाशाहों में गिना जाता है। उन्होंने साल 2022 में सैन्य तख्तापलट करते हुए देश की सत्ता पर कब्जा जमा लिया था और तब से अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में बने हुए हैं। तख्तापलट के समय उनकी उम्र सिर्फ 34 साल थी और दुनिया के सबसे युवा राष्ट्राध्यक्ष बने। वह देश के दूसरे सबसे युवा तानाशाह हैं। अपने पैन अफ्रीकी विचारों के लिए जाने वाले इब्राहिम ट्राओरे ने खुद को राष्ट्रवादी और साम्राज्य विरोधी के रूप में स्थापित किया है।
5 बार जान से मारने की हो चुकी कोशिश
इब्राहिम ट्राओरे का जन्म साल 1988 में पश्चिमी बुर्किना फासो के केरा में हुआ था। विज्ञान और भूविज्ञान में स्नातक की डिग्री लेने के बाद वह देश की सेना में शामिल हो गए। देश में जिहादी विद्रोह के दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। सितंबर 2022 में उन्होंने सफलत तख्तापलट का नेतृत्व किया, जिसने तत्कालीन अंतरिम राष्ट्रपति पॉल हेनरी सैंडाओगो डामिबा को हटा दिया। सत्ता संभालने के बाद ट्राओरे को 5 बार मारने की कोशिश की गई है, जिसे हर बार नाकाम कर दिया गया है।
लोकतंत्र के खिलाफ
ट्राओरे ने इसी साल अप्रैल की शुरुआत में एक इंटरव्यू में लोकतंत्र को जानलेवा बताया था और कहा था कि देश के लोगों को भूल जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्यादातर अफ्रीकी लोग लोकतंत्र की व्यवस्था नहीं चाहते और बुर्किना फासो का अपना एक अलग तरीका है। ट्राओरे ने कहा था कि लोगों को लोकतंत्र को भूल जाना चाहिए। लोकतंत्र हमारे लिए नहीं है। लीबिया को देखिए। यह हमारे पास का ही एक उदाहरण है।
ट्राओरे के नेतृत्व में बुर्किना फासो ने देश को धर्मनिरपेक्ष बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। पिछले महीने बुर्किना फासो की विधायिका ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कानून को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। इस नए कानून का मकसद एक धर्मनिरपेक्ष देश में पूजा की आजादी की गारंटी देना है। इसके पहले मई के आखिर में देश के धार्मिक नेताओं ने बिल के ड्राफ्ट को लेकर विरोध किया था, जिनमें ओआगाडोगू की ग्रैंड सुन्नी मस्जिद के इमाम भी शामिल थे। विरोध के बाद इमाम को गिरफ्तार कर लिया गया था।