पथरी का दर्द जिस इंसान ने एक बार झेला हो, वही समझ सकता है कि यह कितना असहनीय होता है. कमर के पीछे से उठता हुआ वह तेज दर्द, उल्टी जैसा मन और पेशाब में जलन इंसान को बेहाल कर देती है. कई लोग सर्जरी करवाकर राहत की सांस लेते हैं, लेकिन साल-दो साल बाद पता चलता है कि पथरी दोबारा लौट आई है.
मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर बार-बार किडनी में पथरी क्यों बन जाती है? क्या हर बार शरीर पर चीरा लगवाना या लेजर सर्जरी कराना ही पड़ेगा? इस बारे में देहरादून के आरजी हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भाविन ब्रह्मभट्ट का कहना है कि बार-बार पथरी बनने की समस्या को केवल सर्जरी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. आइए समझते हैं कि हमारे शरीर में ऐसा क्या होता है कि यह पत्थर बार-बार जन्म लेने लगते हैं और इनसे हमेशा के लिए छुटकारा कैसे पाया जा सकता है.
आखिर किडनी में बार-बार पथरी बनती क्यों है?
किडनी लगातार खून को फिल्टर करती रहती है और शरीर के बेकार पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है. परेशानी तब शुरू हो सकती है जब पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट या यूरिक एसिड जैसे पदार्थ ज्यादा जमा होने लगें. पानी कम पीने पर यूरिन ज्यादा कॉन्संट्रेट हो सकता है और इनमें से कुछ पदार्थ छोटे-छोटे क्रिस्टल बनाने लगते हैं. समय के साथ यही क्रिस्टल मिलकर स्टोन का रूप ले सकते हैं.
क्रिस्टल का जमना: यूरिन में कैल्शियम, ऑक्सलेट और यूरिक एसिड जब ज्यादा गाढ़े हो जाते हैं, तो ये छोटे-छोटे कणों (क्रिस्टल्स) का रूप ले लेते हैं. यही कण आपस में चिपककर धीरे-धीरे पत्थर बन जाते हैं.