भोपाल। मध्य प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों की नीलामी से सरकार को बड़े राजस्व की उम्मीद है। अब तक छह चरणों में हुई ई-टेंडर प्रक्रिया के आधार पर करीब 11,827 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक है। वहीं पूरे वर्ष में शराब दुकानों से कुल 19,952 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है, जिससे आबकारी राजस्व में करीब 20 प्रतिशत वृद्धि संभावित है।
सरकार ने इस वर्ष शराब दुकानों के आवंटन के लिए ई-टेंडर और ई-ऑक्शन प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है। वर्ष 2025-26 के वार्षिक मूल्य में 20 प्रतिशत वृद्धि कर 2026-27 के लिए आरक्षित मूल्य तय किया गया है।
कई जिलों में 100% राजस्व लक्ष्य पूरा
समीक्षा बैठक में बताया गया कि उमरिया, सीधी, शहडोल, मंडला, डिंडोरी और खरगौन जैसे जिलों में 100 प्रतिशत राजस्व निष्पादन हो चुका है। इससे सरकार को उम्मीद है कि अन्य जिलों में भी जल्द लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
कुछ बड़े शहरों में पिछड़ रहा राजस्व
इंदौर (78%), ग्वालियर (79%), धार (76%), शिवपुरी (80%), रीवा (85%) और खंडवा (82%) जैसे जिलों में अभी तक अपेक्षाकृत कम राजस्व वसूली हुई है। इसके अलावा अशोकनगर, सिंगरौली और नर्मदापुरम भी लक्ष्य से पीछे हैं।
टेंडर प्रक्रिया की नई तारीख
ऑनलाइन निविदा प्रपत्र खोलने की तिथि 24 मार्च से बढ़ाकर 28 मार्च कर दी गई है। अब सभी टेंडर इसी दिन खोले जाएंगे, जिससे प्रक्रिया को और बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।
अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भोपाल, जबलपुर, रतलाम, कटनी, शाजापुर, आलीराजपुर, दमोह, नीमच और झाबुआ जैसे जिलों में राजस्व लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
समीक्षा बैठक में मंत्री रहे मौजूद
मंत्रिपरिषद समिति की बैठक में परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में राजस्व बढ़ाने के उपायों और प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
आगे की रणनीति
सरकार का फोकस अब शेष जिलों में राजस्व लक्ष्य हासिल करने और पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर है, ताकि निर्धारित लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सके।