बीजिंग: चीन पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारतीय विमानों को लेकर प्रोपेगैंडा फैला रहा है। चीनी मीडिया पिछले एक सवा साल से लगातार अपने रक्षा उपकरणों जैसे J-10CE लड़ाकू विमान और PL-15 एयर टू एयर मिसाइल को इंटरनेशनल मार्केट में बेचने और माइंड गेम खेलने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दावे कर रहा है। चीन पिछले सवा साल से हर दूसरे दिन भारतीय विमानों से मुकाबले को लेकर नई कहानियां सुना रहा है। वहीं कुछ अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ऑउटलेट हर दूसरे दिन चीनी विमानों के बिकने की रिपोर्ट पब्लिश करते हैं।
क्या J 10CE का रडार राफेल को चकमा दे सकता है?
चीन के सरकारी मीडिया Sohu ने देश के शीर्ष रडार साइंटिस्ट बेन डे का हवाला देते हुए दावा किया है कि मई 2025 की झड़पों के दौरान पाकिस्तानी J-10CE फाइटर जेट्स ने AWACS या नेटवर्क वाली किल चेन पर निर्भर हुए बिना लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर भारतीय जेट्स का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और मार गिराने के लिए अपने ऑनबोर्ड KLJ-7A AESA रडार का इस्तेमाल किया था।अभी तक चीन की सरकारी मीडिया जैसे सीसीटीवी और चीन के दूसरे डिफेंस एक्सपर्ट्स भारतीय विमानों के खिलाफ ‘किल चेन’ बनाने का दावा कर रहे थे। नई कहानी में कहा गया है कि KLJ-7A AESA रडार में लगे गैलियम नाइट्राइड मॉड्यूल और ‘लो-प्रोबेबिलिटी-ऑफ-इंटरसेप्ट’ वेवफॉर्म्स का मतलब था कि PL-15 मिसाइलों के लगने से पहले भारतीय राफेल, मिग-29 और Su-30MKI को लॉक होने की चेतावनी नहीं मिली।
चीनी सरकारी मीडिया का दावा है कि यह रडार आधुनिक चौथी पीढ़ी के फाइटर्स के खिलाफ करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर विमान का पता लगाने, उसे लगातार ट्रैक करने और हमला करने का काम खुद ब खुद कर सकता है।
चीन भारतीय विमानों के खिलाफ कैसे फैला रहा प्रोपेगैंडा?
मई 2025 में हुए झड़प के तुरंत बाद चीन ने दावा किया था कि पाकिस्तान की इस कथित सफलता के पीछे चीन के ZDK-03 AEW&C (अवाक्स विमान), J-10CE फाइटर जेट और PL-15 मिसाइलों का एक संयुक्त नेटवर्क और ‘किल चेन’ था। लेकिन अब 14 महीने बाद चीन का सरकारी मीडिया अचानक अपनी कहानी बदलकर दावा कर रहा है कि जे-10सीई ने बिना किसी अवाक्स की मदद के अकेले अपने ऑनबोर्ड KLJ-7A रडार से भारतीय विमानों को मार गिराया। यानि चीन ने अब किल चेन को ठुकरा दिया है।