भोपाल, भोपाल में चार दिन से चल रहे ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का शनिवार को समापन हो गया। आखिरी दिन ब्रिक्स देश के संस्कृति मंत्रियों की मौजूदगी में मीटिंग हुई। इसमें ‘भोपाल घोषणा पत्र’ जारी किया गया। साथ ही सभी देशों के कलाकारों को मौका देने, चोरी या गलत रास्ते से विदेशों में पहुंची सांस्कृतिक संपदाओं को वापस लाने का निर्णय लिया गया।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि बीते 3 दिन से जो मंथन चल रहा था, उस सम्मेलन का भोपाल घोषणा पत्र के साथ समापन हुआ। साझेदार देशों के बीच संस्कृति को बढ़ावा देने पर विचार हुआ है। यह ब्रिक्स देशों की 11वीं बैठक है। 11 देश के 55 प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। सम्मेलन की थीम ‘लचीलापन, नवाचार और स्थिरता’ थी। पहली बार समयावधि लक्ष्य तय किए हैं। सांस्कृतिक और विरासत को लेकर साझा रोडमेप तैयार किया। डिजिटल माध्यम भी इस घोषणा पत्र में तैयार किया गया। सांस्कृतिक संपदाओं को वापस लाने की भी पहल इस डॉक्यूमेंट में की गई है।
भोपाल घोषणा का उद्देश्य ब्रिक्स सांस्कृतिक सहयोग के संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करना, संस्कृति और विरासत के समकालीन एवं पारंपरिक क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए साझा रोडमैप प्रदान करना है। एक प्रमुख क्षेत्र सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योग तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सहयोग है। जिसमें कार्यप्रणालियों, अनुभवों और श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान, रचनाकारों को सहयोग, नेटवर्किंग तथा डिजिटल साधनों के माध्यम से बाजार तक पहुंच के अवसरों का विस्तार शामिल हैं।
- घोषणा में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रियाओं पर सहयोग को बढ़ाने का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य साझा और परस्पर संबद्ध सांस्कृतिक विरासत की मान्यता तथा संरक्षण के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना है।
- यह सांस्कृतिक संपदा के उद्गम-अनुसंधान तथा उसकी वापसी और पुनर्स्थापन को भी बढ़े हुए सहयोग के क्षेत्र के रूप में चिन्हित करती है। जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ट्रेसिंग टूल्स की संभावनाओं का पता लगाना शामिल हैं।
- पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का संरक्षण भी घोषणा में शामिल एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जिसमें पीढ़ियों से हस्तांतरित सांस्कृतिक ज्ञान और अभिव्यक्तियों की सुरक्षा एवं निरंतरता की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है।
- घोषणा में संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार के बीच विशेष रूप से दस्तावेजी विरासत, डिजिटलीकरण और संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया गया है। इससे सांस्कृतिक और दस्तावेजी संसाधनों के संरक्षण में संस्थागत आदान-प्रदान तथा विशेषज्ञता साझा करने की व्यापक संभावनाएँ उपलब्ध होंगी।
- रचनाकारों के अधिकार भी सहमति से निर्धारित सहयोग के क्षेत्रों का हिस्सा हैं। घोषणा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों में कॉपीराइट संरक्षित कृतियों के उपयोग के संबंध में पारदर्शिता तथा उचित और न्यायसंगत पारिश्रमिक का विषय शामिल हैं।