नई दिल्ली: देश में फेस्टिव सीजन से पहले चीनी की कीमत में रेकॉर्ड तेजी आई है। इस बीच सरकार का कहना है कि मौजूदा सीजन (अक्तूबर-सितंबर) में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहने का अनुमान है। यह 343 लाख टन के शुरुआती अनुमान से 11% कम है। सरकार ने साथ ही इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि इथेनॉल बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल करने से उपलब्धता पर असर पड़ रहा है और कीमतें बढ़ रही हैं। सरकार ने कहा कि कुछ साल पहले की तुलना में अब इथेनॉल बनाने के लिए कम चीनी का इस्तेमाल होता है।
क्यों बढ़ी कीमत?
सरकार ने सप्लाई की चिंताओं को दूर करने के लिए गुरुवार को 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। शुक्रवार को चीनी की खुदरा कीमत 58.2 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं। यह एक महीने पहले की तुलना में 20% और एक साल पहले की तुलना में लगभग 26% अधिक हैं।
इथेनॉल बनाने में कितनी चीनी?
इथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल से कीमतों पर असर पड़ने की बात को खारिज करते हुए मंत्रालय ने कहा कि इसमें इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% रह गया है। उन्होंने कहा कि देश में बनने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज से आता है।
निर्यात पर रोक
अधिकारियों ने कहा कि जनवरी में उत्पादन घटने के शुरुआती संकेत मिले थे, लेकिन मिलों में गन्ने की पेराई जारी थी। एक सूत्र ने बताया कि निर्यात मार्च में ही शुरू हुआ था और जैसे ही उत्पादन कम होने के संकेत मिले, मई की शुरुआत में ही निर्यात पर रोक लगा दी गई। सरकार का कहना है कि चीनी की सप्लाई में कमी एक वैश्विक समस्या है और 2026-27 के लिए वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी का अनुमान 33 लाख टन लगाया गया है।