मुंबई : बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब फिल्म इंडस्ट्री से निकलकर राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। कृति के विज्ञापन में उनके पहनावे पर बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत की आपत्ति के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्ट्रेस कृति सेनन का समर्थन किया था। राहुल गांधी ने महिलाओं के कपड़ों और उनकी जिंदगी को लेकर ऑनलाइन पुलिसिंग किए जाने का विरोध किया था। अब राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने कृति के समर्थन में अपनी बात रखी है जबकि भाजपा और उनके सहयोगी दलों की ओर से राहुल और कृति के रुख पर सवाल उठाए गए हैं।
कांग्रेस नेता उदित राज ने कंगना रनौत पर निशाना साधा और कहा कि कंगना को पहले अपनी पुरानी तस्वीरें देखनी चाहिए और उसके बाद कृति सेनन के पहनावे पर टिप्पणी करनी चाहिए। अगर उनमें थोड़ी भी समझ, शराफत और ईमानदारी बची है, तो उन्हें कृति और सभी लोगों से माफी मांगनी चाहिए।
‘जिनके मकान शीशे के, वे दूसरों के घर पत्थर नहीं मारते’
उदित राज ने कंगना के पुराने पहनावे का हवाला देते हुए सवाल किया, ‘क्या उनसे ज्यादा किसी ने अपनी बॉडी दिखाई है। एक कहावत है- ‘जिनके मकान खुद शीशे के हों, उन्हें दूसरे के घर पर पत्थर नहीं मारना चाहिए।’ और कंगना ने ऐसा ही काम किया है। मुझे लगता है कि इस मामले में उन्हें माफी मांग लेनी चाहिए। हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने की आजादी है। कौन क्या खाएगा और कौन क्या पहनेगा, इस पर किसी दूसरे व्यक्ति को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। हमारे समाज की एक कमी यह है कि लोग अपने बारे में कम और दूसरों के बारे में ज्यादा सोचते हैं।’
राहुल गांधी पर बरसीं शाइना एनसी
वहीं, मुंबई में शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की आदत बन गई है कि वह हर मुद्दे में दखल देते हैं। शाइना एनसी ने कहा कि राहुल गांधी की आदत बन गई है कि वे हर जगह हर चीज में दखल देते हैं। स्टूडेंट्स के मामले में भी, वे खुद को ऐसे दिखाते हैं जैसे वे कोई मसीहा हों। जब भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे, महिलाओं के सम्मान या उनके कपड़ों की बात आती है, राहुल गांधी उस पर भी प्रतिक्रिया देने लगते हैं। क्या वह इस तरह की संस्कृति को स्वीकार करते हैं, जिसमें बिकिनी पहनकर रक्षाबंधन मनाया जा सकता है। भारतीय संस्कृति और सभ्यता में इस तरह की चीज स्वीकार्य नहीं है।
‘कपड़ों से तय नहीं होता व्यक्ति का चरित्र’
पटना में जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने इस मामले में कुछ अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कृति के विज्ञापन का विरोध करने वाले पूरी तरह सही नहीं हैं। कपड़े और किसी व्यक्ति का खुद को पेश करने का तरीका भारतीय संस्कृति का हिस्सा हो सकता है और कोशिश होनी चाहिए कि उससे दूसरों को भी अच्छा महसूस हो। हालांकि सिर्फ किसी व्यक्ति के कपड़े देखकर उसके चरित्र या नीयत पर शक नहीं किया जा सकता।
क्या है कृति सेनन और कंगना रनौत विवाद?
दरअसल, पूरा विवाद रक्षाबंधन के मौके पर एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन से शुरू हुआ। इस विज्ञापन में कृति सेनन ऑफ-व्हाइट रंग के इंडो-वेस्टर्न आउटफिट में नजर आई थीं। उन्होंने ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज, ड्रेप्ड स्कर्ट और केप पहना था। विज्ञापन में वह अपने भाई के साथ-साथ अपने पालतू कुत्ते को भी राखी बांधती नजर आईं। विज्ञापन सामने आने के बाद लोगों ने उनके पहनावे और विज्ञापन की थीम पर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद कंगना रनौत ने भी बिना कृति का नाम लिए विज्ञापन पर टिप्पणी की। उन्होंने सवाल किया था कि जब महिलाओं के पास कपड़ों के इतने विकल्प हैं, तो कोई अपने भाई को बिकिनी या अंडरगारमेंट्स में राखी क्यों बांधेगी। कंगना ने विज्ञापन की स्टाइलिंग को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि यह जानबूझकर अजीब बनाया गया लगता है।
भाई से पहले कुत्ते को राखी बांधने का बना मुद्दा
इसके बाद कृति सेनन ने सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि त्योहारों का असली मतलब इंसान के पहने हुए कपड़ों में नहीं बल्कि उन परंपराओं से जुड़ी भावनाओं और रिश्तों में होता है। वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे की सुरक्षा, अच्छी सेहत, खुशी और लंबी उम्र की कामना करती हैं। उन्होंने अपने पालतू कुत्तों को भी परिवार का हिस्सा बताया।
इसी विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कृति का समर्थन किया। उन्होंने कृति की पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर करते हुए कहा कि एक महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने महिलाओं को अपनी आजादी का इस्तेमाल करने के लिए ट्रोल किए जाने का विरोध किया।