भोपाल के बड़े तालाब का सच आया सामने, रिकॉर्ड से ज्यादा निकला दायरा, गायब मिलीं एफटीएल मुनारें

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर भोपाल के बड़े तालाब की वास्तविक और कागजी सीमा का सच जानने के लिए रविवार को गौहर महल से सघन सर्वे की शुरुआत की गई। जांच के लिए दो विशेष टीमें मैदान में उतरीं। एक टीम ने आसमान से ड्रोन के जरिए तस्वीरें कैद कीं, तो दूसरी ने जमीन पर उतरकर ग्राउंड ट्रुथिंग की।

शुरुआती जांच में ही यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि तालाब का दायरा रिकॉर्ड में दर्ज सीमा से कहीं ज्यादा है। कई जगहों पर जलस्तर रिटेनिंग वॉल को भी पार कर चुका है, जिससे बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण और सीमा चिह्नों (मुनारों) के गायब होने की पोल खुल गई है।

खानूगांव और हलालपुरा में गायब मिले सीमा चिह्न

  • जांच दल ने पहले दिन खानूगांव, कोहेफिजा, हलालपुरा स्थित फिजा फार्म, लैंडमार्क मैरिज गार्डन और चिरायु अस्पताल के पिछले हिस्से का निरीक्षण किया। खानूगांव क्षेत्र में जहां फुल टैंक लेवल (एफटीएल) की कई मुनारें होनी चाहिए थीं, वहां टीम को बमुश्किल सिर्फ एक मुनार नजर आई।
  • टीम ने श्मशान घाट, निर्माणाधीन क्रूज साइट और आर्मी स्पोर्ट्स एरिया का भी जायजा लिया। हलालपुरा के पीछे एफटीएल दायरे में औद्योगिक निर्माण जैसी गतिविधियां देखी गईं। वहीं, लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पीछे करीब 6 फीट का भराव और पानी पाया गया, जबकि यहां से एफटीएल की मुनारें पूरी तरह से गायब थीं।

रिटेनिंग वॉल के ऊपर तक पहुंचा जलभराव

  • सर्वे के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जलभराव उन चिन्हित पक्की संरचनाओं से काफी आगे निकल चुका है जिन्हें अंतिम सीमा माना जा रहा था। कई स्थानों पर पानी रिटेनिंग वॉल के ऊपर बहता मिला। हलालपुरा के फिजा फार्म में तो पक्के पुल के आगे तक तालाब का पानी पहुंच चुका है।
  • टीम ने इस जमीनी हकीकत को दर्ज कर लिया है, जिसका अब कागजी रिकॉर्ड, एफटीएल और ग्रीन बेल्ट के मानकों के साथ तकनीकी मिलान किया जाएगा। इसके अलावा, कर्बला पंप हाउस और सीरीन नदी के आसपास बड़े हिस्से में जलकुंभी और जलीय घास का फैलाव देखने को मिला।

ड्रोन गिरने से टूटी पंखुड़ी, बैरागढ़ में आज होगा सर्वे

  • खानूगांव और कोहेफिजा के आसपास एयरपोर्ट का नजदीकी क्षेत्र होने के कारण छोटे ड्रोन से सर्वे किया जा रहा था। इसी दौरान एक ड्रोन अचानक गिर गया, जिससे उसकी पंखुड़ी टूट गई। हालांकि, इस बाधा के बावजूद सर्वे का काम जारी रहा और टीम ने चिरायु अस्पताल तक के क्षेत्र का मुआयना किया।
  • इस महत्वपूर्ण जांच टीम में सर्वे विशेषज्ञ सुभाष सी. पांडे, याचिकाकर्ता राशिद नूर खान सहित नगर निगम, जिला प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) के अधिकारी शामिल रहे। रविवार को तालाब के सिर्फ एक छोर की जांच पूरी हो सकी है। बैरागढ़, रातीबड़ और बिशनखेड़ी जैसे अहम इलाकों में सोमवार को सर्वे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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