कौन-से लक्षण दिखने पर समझ लेना चाहिए अब निकलवाने पड़ेंगे टॉन्सिल, कब नहीं होती सर्जरी की जरूरत?

गले में बार-बार दर्द, सूजन, बुखार और खाना निगलने में परेशानी हो तो अक्सर लोग टॉन्सिल्स को इसकी वजह मान लेते हैं। कई बार लगातार होने वाले टॉन्सिलाइटिस के कारण यह सवाल भी उठता है कि क्या अब टॉन्सिल्स का ऑपरेशन यानी Tonsillectomy करा लेना चाहिए? हालांकि हर बार गले में इंफेक्शन होने पर सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। कई मामलों में दवाओं और उचित देखभाल से समस्या नियंत्रित हो जाती है। लेकिन अगर टॉन्सिलाइटिस बार-बार और गंभीर हो रहे हों और इसका असर स्कूल, ऑफिस या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो डॉक्टर सर्जरी (Tonsillectomy) पर विचार कर सकते हैं। कुछ लोगों में बार-बार बड़े टॉन्सिल्स के कारण सोते समय सांस लेने में परेशानी भी सर्जरी की वजह बन सकती है।

टॉन्सिल्स क्या होते हैं और इनका काम क्या है?

मैयोक्लीनिक के मुताबिक टॉन्सिल्स गले के पीछे मौजूद लिम्फेटिक टिशू के दो छोटे हिस्से होते हैं। ये शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा हैं और मुंह तथा नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करने वाले कुछ कीटाणुओं को पहचानने में भूमिका निभाते हैं। बच्चों में टॉन्सिल्स का इम्यून सिस्टम खासतौर पर सक्रिय हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इनका आकार और उनकी भूमिका बदल सकती है। इसलिए केवल टॉन्सिल्स का बड़ा होना अपने आप में ऑपरेशन का कारण नहीं माना जाता।

जब टॉन्सिल्स में संक्रमण या इंफ्लेमेशन होता है, तो इसे टॉन्सिलाइटिस (Tonsillitis) कहा जाता है। इसमें गले में दर्द, निगलने में परेशानी, टॉन्सिल्स पर सफेद या पीले पैच्स, बुखार और गर्दन की लम्फेटिक नोड्स में सूजन जैसे लक्षण हो सकते हैं।

क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक टॉन्सिलेक्टॉमी (Tonsillectomy) एक सर्जिकल प्रक्रिया है और किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी जोखिम होते हैं। इसलिए अगर इंफेक्शन कभी-कभार होता है और उपचार से ठीक हो जाता है, तो आमतौर पर टॉन्सिल्स को निकालने की जरूरत नहीं होती। विशेष रूप से उन बच्चों को कुछ समय के लिए रूकने की सलाह दे जा सकती है, जिनमें बार-बार होने वाले गले के इंफेक्शन की संख्या निर्धारित संख्या से कम होती है।

इसका एक कारण यह भी है कि उम्र के साथ कई बच्चों में बार-बार होने वाले गले का इंफेक्शन धीरे-धीरे अपने आप कम हो सकता है। कई पुराने क्लीनिकल दस्तावेजों में में भी ऐसे बच्चों का एक हिस्सा देखा गया जो कुछ समय तक इंतजार करने के बाद सर्जरी के लिए निर्धारित नियमों को पूरा नहीं करते रहे थे।

इसलिए डॉक्टर आमतौर पर केवल "कितनी बार इंफेक्शन हुआ" नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि इंफेक्शन कितना गंभीर था, इससे बच्चे के स्कूल या काम पर कितना असर पड़ा और दवाओं से कितनी राहत मिली।

अमेरिका एकेडमी ऑफ ओटोलेरिजोलॉजी के अनुसार टॉन्सिल्स का ऑपरेशन मुख्य रूप से कुछ विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है।

  • बार-बार होने वाला गंभीर टॉन्सिलाइटिस
  • अगर गंभीर टॉन्सिलटाइटिस बार-बार होता है और यह समस्या इतनी गंभीर हैं कि व्यक्ति की सामान्य जिंदगी, स्कूल या काम प्रभावित होने लगता है, तो डॉक्टर सर्जरी पर विचार कर सकते हैं।

बच्चों के लिए टॉन्सिल होने पर निर्देश क्या हो सकते है-

  • पिछले एक साल में 7 या अधिक बार होना
  • पिछले दो वर्षों में हर साल 5 या अधिक बार होना
  • पिछले तीन वर्षों में हर साल 3 या अधिक होना

इसके अलावा डॉक्टर क्लीनिकल रिकॉर्ड्स के साथ सर्वाइकल लिम्फ नोड का बढ़ना, बुखार और ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकल टेस्ट की पॉजिटिव रिपोर्ट आदि को देखते हैं।

हर बार टॉन्सिल होने पर सीधा ऑपरेशन नहीं किया जाता है। कई लोगों में इंफेक्शन समय के साथ और उचित मेडिकल इलाज से नियंत्रित हो सकता है। खासकर बच्चों में निर्धारित निर्देशों के बाद ही सर्जरी की जाती है। यदि किसी भी व्यक्ति को बार-बार गले में दर्द हो रहा है तो वह खुद से दवा न लें। इसके लिए आप तुरंत ईएनटी स्पेशलिस्ट से संपर्क करें और सही इलाज कराएं।

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