मिस्र भारत के साथ खड़ा है, कई क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने के लिए तैयार

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान, मैं भारत को 2026 की अध्यक्षता संभालने पर बधाई देता हूं। साथ ही, मैं सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों की सराहना करता हूं, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और क्षेत्रीय व वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली देश है। मिस्र भी इस साझेदारी में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए अच्छी स्थिति में है और हमेशा भारत के साथ खड़ा है। इसका कारण इसकी अनूठी भौगोलिक स्थिति, आधुनिक बुनियादी ढांचा, बंदरगाहों और परिवहन संपर्कों का व्यापक नेटवर्क, तथा अरब जगत, अफ्रीका और यूरोप के साथ गहरे आर्थिक और व्यापारिक संबंध हैं। ये खूबियां व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं।


इस नजरिए से, मिस्र उन सभी पहलों का स्वागत करता है जो आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार व निवेश के नए रास्ते खोलने में मदद करती हैं, खासकर स्वेज नहर और उसके आर्थिक क्षेत्र के जरिए। ग्लोबल ट्रेड में तरक्की ऐसे नेटवर्क के एकीकरण और निर्माण से हासिल होती है जो कुशल, मजबूत और हालात के अनुसार ढलने वाले हों। ऐसे नेटवर्क ग्लोबल इकॉनमी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करते हैं और भारतीय कंपनियों को मिस्र तक पहुंच देते हैं, जो ग्लोबल ट्रेड और वैल्यू चेन के लिए एक अहम केंद्र है, साथ ही एनर्जी ट्रांजिट, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र भी है।

हम स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देने के साथ-साथ फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स, रिन्यूएबल एनर्जी (RE), ग्रीन हाइड्रोजन और IT जैसे साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए भी उत्सुक हैं। हम यूनिवर्सिटीज, रिसर्च इंस्टीट्यूट्स और इनोवेशन सेंटर्स के बीच संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं, ताकि दोनों देशों के युवाओं को सीखने, क्रिएटिविटी और भविष्य की अर्थव्यवस्था के निर्माण में भागीदारी के बेहतर अवसर मिल सकें।

अफ्रीकी महाद्वीप मिस्र और भारत के सहयोग के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करता है, जिसे अफ्रीकी देशों की प्राथमिकताओं और वहां के लोगों की जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इससे उनकी उत्पादक क्षमताओं को बढ़ाने, टेक्नोलॉजी और ज्ञान तक उनकी पहुंच का विस्तार करने और सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) हासिल करने के उनके प्रयासों में मदद मिलनी चाहिए।


2024 में मिस्र के ब्रिक्स में शामिल होने से भारत और अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग के नए और व्यापक रास्ते खुले हैं। न्यू डेवलपमेंट बैंक की सदस्यता ने भी विकास और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने वाले साधनों में विविधता लाने में योगदान दिया है। मिस्र और भारत ब्रिक्स को किसी देश या देशों के समूह के खिलाफ बने ढांचे के बजाय सहयोग, विकास और बातचीत के एक मंच के तौर पर देखते हैं।

बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कॉम्पिटिशन और ध्रुवीकरण के दौर में, मिस्र अपनी विदेश नीति के मुख्य सिद्धांत के तौर पर रणनीतिक संतुलन की नीति बनाए हुए है—यह नीति राष्ट्रीय स्तर पर फैसले लेने की आज़ादी, साझेदारियों में विविधता लाने और आपसी सम्मान व साझा हितों के आधार पर अलग-अलग ताकतों के साथ संतुलित संबंध बनाने पर आधारित है।


इसी भावना के साथ, मिस्र पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से रोकने, संघर्ष खत्म करने और सुरक्षा व स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। उसने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया है कि कूटनीति और शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान ही संकटों को सुलझाने का रास्ता हैं, और व्यापक क्षेत्रीय बातचीत।

पश्चिम एशिया में किसी भी स्थायी शांति के लिए फ़िलिस्तीनी मुद्दा केंद्र में है। फिलिस्तीनी लोगों के जायज़ और कभी न छीने जा सकने वाले अधिकारों को बहाल करने वाला न्यायपूर्ण और व्यापक समझौता किए बिना अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की बात करना संभव नहीं है। इन अधिकारों में सबसे अहम है अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों के अनुसार, पूर्वी यरूशलेम को राजधानी बनाकर 4 जून 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करने का अधिकार है।


मिस्र, ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ की सुरक्षा और स्थिरता को बहुत अहमियत देता है क्योंकि वह इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का ही एक हिस्सा मानता है। साथ ही, वह रेड सी (लाल सागर) को भी बहुत महत्व देता है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक अहम समुद्री रास्ता है। मिस्र रेड सी को सैन्य क्षेत्र बनाने की किसी भी कोशिश को भी खारिज करता है।

हम भारत के साथ ऐसी साझेदारी की उम्मीद करते हैं जिससे हमारे दोनों देशों के लोगों के लिए ज़्यादा विकास और खुशहाली आए, हमारे-हमारे इलाकों में शांति और स्थिरता बढ़े, और एक ज़्यादा न्यायपूर्ण और संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने में मदद मिले।

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