जवान लोगों को शुगर का मरीज बना रहा है पेट, बस 5 तरीके बचा सकते हैं आपको

आजकल प्रीडायबिटीज सिर्फ उम्रदराज लोगों की समस्या नहीं रह गई है। कम उम्र में बढ़ता वजन, गतिहीन जीवनशैली, खराब खान-पान, कम नींद और लगातार तनाव ब्लड शुगर और इंसुलिन संवेदनशीलता पर असर डाल सकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी आंतों की सेहत यानी गट हेल्थ का भी प्रीडायबिटीज के खतरे से कोई संबंध हो सकता है? हमारी आंतों में मौजूद खरबों सूक्ष्मजीव यानी गट माइक्रोबायोम पाचन के साथ-साथ मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम को भी प्रभावित करते हैं। कुछ रिसर्च में गट माइक्रोबायोम में होने वाले कम्पाउंड्स को इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर रेगुलेशन से जोड़ा गया है। हालांकि, गट हेल्थ को प्रीडायबिटीज का अकेला कारण मान लेना सही नहीं है। फिर भी फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ, साबुत अनाज, फल, सब्जियां और फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करना, प्रोसेस्ड फूड्स कम करना और नियमित व्यायाम, अच्छी नींद व स्ट्रेस मैनेजमेंट जैसे बदलाव मेटाबोलिक हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं।

क्या गट हेल्थ और प्रीडायबिटीज के बीच कोई कनेक्शन है?

प्रीडायबिटीज को आमतौर पर डायबिटीज से पहले की स्थिति माना जाता है, लेकिन यह केवल ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या नहीं है। शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, सूजन और मेटाबॉलिक हेल्थ में बदलाव इसके साथ जुड़े हो सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों का ध्यान गट माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद खरबों सुक्ष्म जीवों और मेटबॉलिक हेल्थ के बीच संबंध पर भी गया है।

नेचर रिव्यूज माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित एक रिव्यू के मुताबिक, गट माइक्रोबायोटा में होने वाले बदलाव मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और अन्य कार्डियोमेटाबॉलिक डिसऑर्डर से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, रिसर्चर यह भी मानते हैं कि गट माइक्रोबायोम और मेटाबॉलिक डिजीज के बीच संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

प्रीडायबिटीज से बचाव के लिए गट हेल्थ में क्या बदलाव करने चाहिए?

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में करें शामिल

आंतों के बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) के लिए डाइटरी फाइबर एक महत्वपूर्ण फूड सोर्स है। दालें, चना, राजमा, बीन्स, जई, सब्जियां, फल, मेवे और बीज जैसे खाद्य पदार्थ फाइबर से भरपूर हैं। सीडीसी के अनुसार हाई डाइटरी फाइबर का सेवन करने से ग्लाइसेमिक नियंत्रण, फास्टिंग ग्लूकोज, इंसुलिन रेजिस्टेंस, शरीर का वजन और सूजन से जुड़े कुछ बेहतर रिजल्ट मिलते हैं। हालांकि, फाइबर को अचानक बहुत अधिक वृद्धि के बजाय धीरे धीरे लिया जा सकता है।

साबुत अनाज और फलियां खाएं

सफेद ब्रेड, रिफाइंड आटा और बहुत ज्यादा रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज और फलियां को प्राथमिकता देना गट और मेटाबोलिक हेल्थ दोनों के लिए बेहतर डाइटरी पैटर्न हो सकता है। एनसीबीआई के अनुसार साबुत अनाज और डाइटरी फाइबर पर की गई सिस्टमैटिक रिव्यू में ह्यूमन इंटरवेंशन स्टडीज का एनालिसिस किया गया और कई स्टडीज में साबुत अनाज/फाइबर के सेवन से गट माइक्रोबायोटा में बदलाव देखे गए। इसके लिए आप डाइट में ओट्स, बाजरा, चना, राजमा, आदि को शामिल कर सकते हैं।

पर्याप्त फल और सब्जियां खाएं

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार फल और सब्जियां केवल विटामिन और मिनरल का सोर्स नहीं हैं। इनमें फाइबर और प्लांट कंपाउंड भी होते हैं जो ओवरऑल डाइटरी क्वालिटी और गट माइक्रोबायोम के लिए उपयोगी हो सकते हैं। रोज अलग-अलग रंगों की सब्जियां और साबुत फल लेने की कोशिश करें। इसके लिए आप डाइट में पालक, गाजर, लौकी, भिंडी, टमाटर, शिमला मिर्च, अमरूद, सेब, संतरा और पपीता आदि को शामिल करें।

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड कम करें

पैकेज्ड स्नैक्स, शुगरी ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड मीट, इंस्टेंट फ़ूड, रिफाइंड बेकरी प्रोडक्ट्स और बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड स्नैक्स को रोज की डाइट का बड़ा हिस्सा बनाने से बचें।

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के मुताबिकअल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कंजम्पशन और टाइप 2 डायबिटीज रिस्क के बीच पॉजिटिव जुड़ाव पाया गया। मेटा-एनालिसिस में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड इनटेक में हर 10% बढ़ोतरी को टाइप 2 डायबिटीज रिस्कमें लगभग 12% ज्यादा रिस्क से जोड़ा गया।

पर्याप्त नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें

गट हेल्थ की बात अक्सर खाना तक सीमित रह जाती है, जबकि लाइफस्टाइल भी मेटाबोलिक हेल्थ का हिस्सा है। साइंस डायरेक्ट के अनुसार एक सिस्टमैटिक रिव्यू में नींद की कमी से इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होने की बात सामने आई। रिसर्चर्स ने नींद की अवधि, क्वालिटी और सर्कैडियन टाइमिंग को मेटाबोलिक फंक्शन से जुड़े महत्वपूर्ण फैक्टर बताए।

यही वजह है कि डॉक्टर डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए समय रहते ही बदलाव करने की सलाह देते हैं। प्रीडायिबटीज से बचाव के लिए गट हेल्थ और लाइफस्टाइल में कुछ आवश्यक बदलाव करने की जरूरत होती है। लेकिन, इसे प्रीडायबिटीज या डायबिटीज का इलाज नहीं मानना चाहिए। यदि, डायबिटीज के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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