सुबह उठकर खाली पेट कुछ हेल्दी चीज पीने का ट्रेंड काफी समय से लोगों के बीच लोकप्रिय है। लेमन वाटर, जीरा वाटर, और अब धनिया का पानी भी इसी सेहतमंद ट्रेंड का हिस्सा बन गया है। धनिया आसानी से घर में उपलब्ध होता है और इसे पारंपरिक खान-पान में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। डॉ. मुरलीधर आर. बल्लाल (एसोसिएट प्रोफेसर एसडीएम कॉलेज ऑफ आयुर्वेद) बताते हैं कि आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में धनिया का इस्तेमाल पाचन से जुड़ी परेशानियों सहित कई समस्याओं में किया जाता रहा है। आयुर्वेद में, धनिया अपनी ‘शीत वीर्य’ (ठंडक देने वाली शक्ति) के लिए लोकप्रिय है। आधुनिक रिसर्च में भी धनिया में मौजूद कई बायोएक्टिव कम्पाउंड्स की जांच की गई है। हालांकि, किसी पौधे के पारंपरिक इस्तेमाल और उसके क्लीनिक बैनिफिट के बीच अंतर समझना जरूरी है।
पेट की जलन और शरीर के गर्मी को शांत करता है धनिया का पानी
धनिया का पानी शरीर की बाहरी रक्त वाहिकाओं को आराम देकर शरीर की अतिरिक्त मेटाबोलिक गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए, यह उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जिन्हें सुबह के समय पेट में जलन, हाइपरएसिडिटी या तनाव के कारण अचानक गर्मी महसूस होने (hot flashes) जैसी समस्याएं होती हैं। धनिया के पानी को शरीर के अंदर तापमान को नियंत्रित करने वाले एक हल्के थर्मोस्टेट की तरह समझें। अगर कॉफी आपके शरीर की आंतरिक ऊर्जा को एक्टिवेट करती है, तो धनिया एक ठंडी और स्थिर करने वाली फुहार की तरह है जो शरीर में सूजन या जलन शुरू होने से पहले ही उसे शांत कर देती है।
धनिये में कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
लिनालूल – धनिया में पाए जाने वाला लिनालूल पाचन नली (GI ट्रैक्ट) की मांसपेशियों को आराम देता है। यह वोलेटाइल टरपेनॉइड धनिया के एसेंशियल ऑयल का लगभग 60% से 70% हिस्सा होता है, जो नसों और मांसपेशियों के तनाव को नियंत्रित करने का मुख्य काम करता है।
फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक एसिड – धनिया में पाएं जाने वाले फ्लेवोनोइड्स फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं। इसके अलावा, क्वेरसेटिन, एपिजेनिन और कैफिक एसिड की ज्यादा मात्रा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के खिलाफ एक बायोलॉजिकल सुरक्षा कवच का काम करती है।
जरूरी मिनरल्स – धनिया में पाए जाने वाले पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन की प्राकृतिक मात्रा, शरीर के लिए जरूरी कम मात्रा वाले तत्व (ट्रेस एलिमेंट्स) भी प्रदान करती है। साथ ही, अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालने में मदद करती है।
पाचन के लिए धनिया का पानी
मॉडर्न गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी के नजरिए से, धनिया का पानी एक बहुत असरदार कार्मिनेटिव (पेट की गैस और ऐंठन कम करने वाला) की तरह काम करता है। जब लिनालूल आपके पेट में जाता है, तो यह आपकी पाचन नली की चिकनी मांसपेशियों की दीवारों के साथ प्रतिक्रिया करता है। यह ऐंठन को कम करता है और शरीर के प्राकृतिक गैस्ट्रिक और पैंक्रियाटिक एंजाइम के स्राव (secretion) को सक्रिय करता है। अगर आपको अक्सर सुबह-सुबह पेट फूलने, एसिड रिफ्लक्स या पेट में भारीपन महसूस होती है, तो यह लिक्विड पेट की सफाई में मदद कर सकता है। क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन से पता चलता है कि यह पेट खाली होने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे जब आप नाश्ता करते हैं, तो आपके पेट को उसे पचाने में कोई दिक्कत नहीं होती।
ब्लड शुगर पर धनिये के पानी का असर
हेल्थलाइन में प्रकाशित और अन्य रिसर्च द्वारा एक अहम स्टडी से पता चला है कि धनिया के अर्क की एक खुराक ब्लड शुगर को तेजी से कम कर सकती है। असल में, यह इतना असरदार है कि जिन लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर कम होना) है या जो डायबिटीज की दवाएं ले रहे हैं, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि अगर इसकी निगरानी न की जाए, तो यह ब्लड शुगर लेवल को बहुत कम कर सकता है। हालांकि, आम घरों में हम शुद्ध अर्क (extracts) का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि साधारण पानी का इस्तेमाल होता है।
शरीर को कैसे करता है डिटॉक्स
धनिया मूत्र उत्पादन बढ़ाने के लिए किडनी को उत्तेजित करता है। आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स को कम किए बिना अतिरिक्त पानी और सोडियम को बाहर निकालता है, यह तेजी से वाटर रिटेनशन और सुबह की त्वचा की सूजन को कम करने में मदद करता है।
सुबह के समय धनिया के पानी का सेवन कैसे करें?
- रात में 1 बड़ा चम्मच साबुत धनिये के बीज लें। उन्हें मूसल का उपयोग करके हल्के से कुचल दें ताकि बाहरी भूसी फट जाए। उन्हें कमरे के तापमान के 250 मिलीलीटर पानी से भरे गिलास में डालें। इसे ढककर रात भर के लिए छोड़ दें।
- अगली सुबह पानी और बीज को एक छोटे बर्तन में डालें। इसे 2 से 3 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। इसे ज्यादा न उबालें, तेज आंच में उबाले से लिनालूल नष्ट हो सकता है।
- इस पानी को छान लें और खाली पेट हल्का गुनगुना ही पिएं। ध्यान दें कि इस पानी को नाश्ते से करीब 30 मिनट पहले पी सकते हैं।
धनिया के पानी का सेवन कई सालों पहले से किया जा रहा है। यह आपके पाचन तंत्र को बेहतर करने और किडनी की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा पेट साफ होने से आपका वजन भी धीरे-धीरे कंट्रोल होने लगता है, जिससे ब्लड शुगर और अन्य रोगों में भी बेहतर प्रभाव देखने को मिलतेे हैं। अगर आपको पहले से कोई गंभीर रोग है तो आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे डाइट का हिस्सा बनाएं।