नई दिल्ली: पूर्व IPS अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सत्य निकेतन में PG इमारत ढहने से 7 लोगों की मौत के मामले में पक्षकार बनने की इच्छा जताई। हालांकि, उन्हें इस पर अपनी ही पार्टी की सरकार से विरोध का सामना करना पड़ा। सरकार ने कोर्ट से कहा कि बेदी ने सत्य निकेतन हादसे से जुड़े मुद्दों पर पहले ही अपनी राय जाहिर कर दी है। इसलिए मामले में उनकी पहले से एक राय बन चुकी है। केंद्र को अब इस आधार पर अपना विस्तृत जवाब हाई कोर्ट के सामने रखना है।
किरण बेदी जागरूक नागरिक
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने हालांकि बेदी के प्रशासनिक अनुभव को इस जनहित के मामले में उपयोगी बताया। बेंच ने कहा कि वह देश की एक जागरूक नागरिक हैं और उनके पास काफी अनुभव है। कोर्ट ने केंद्र से कहा कि इस मामले को टकराव के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
टकराव के रूप में न लें
तीन दिन में देना होगा जवाब
केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि उन्हें अर्जी का विरोध करने के निर्देश मिले हैं। कोर्ट ने केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया। कोर्ट ने गुरुवार को बेदी की अर्जी पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
एक करोड़ के मुआवजे की मांग
बेदी जिस याचिका में पक्षकार बनना चाहती हैं, वह अनिकेत कुमार गुप्ता की है, जो सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद दायर की गई थी। याचिका में 7 मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने और PG व हॉस्टलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की गई है। कोर्ट MCD को जांच का निर्देश दे चुका है। बेदी ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति बनाने की मांग की है। इसमें वरिष्ठ अधिकारी और जनहित में काम करने वाले लोग शामिल करने का प्रस्ताव है।