नई दिल्ली: हम जब भी कोई नया स्मार्टफोन खरीदते हैं तो सबसे पहला काम उसकी स्क्रीन को सुरक्षित रखने के लिए उसपर टेम्पर्ड ग्लास या स्क्रीन प्रोटेक्टर लगवाते हैं। दुकान पर ये टेम्पर्ड ग्लास अलग-अलग क्वालिटी के मिलते हैं। लेकिन अब सरकार ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर की गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इसे BIS यानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के दायरे में शामिल किया गया है।
इस फैसले के बाद बाजार में बिकने वाले स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए तय गुणवत्ता मानकों का पालन करना जरूरी होगा। इसका मकसद बाजार में बिकने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर की क्वालिटी के लिए एक तय मानक बनाना है।
बनेगा क्वालिटी स्टैंडर्ड
सरकार ने Compulsory Registration Order, 2021 में बदलाव किया है। यह संशोधन BIS Act, 2016 के तहत किया गया है। नए नियम में स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य बीआईएस रजिस्ट्रेशन के दायरे में शामिल किया गया है। इसके लिए एक नया भारतीय मानक भी तय किया गया है। इसका नंबर IS 19348:2025 है और इसका नाम ‘Glass Screen Protector — Specification’ है।
इसका मतलब है कि संबंधित कंपनियों को अपने स्क्रीन प्रोटेक्टर को तय भारतीय मानक के मुताबिक तैयार करना होगा और लागू BIS रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
1 अप्रैल 2027 से लागू होगा नियम
नए नियम को तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगी। यानी 1 अप्रैल 2027 के बाद बाजार में आने वाले संबंधित स्क्रीन प्रोटेक्टर को तय भारतीय मानक के अनुरूप होना होगा। इसके साथ ही निर्माताओं और संबंधित कारोबारियों को लागू BIS नियमों और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
बाजार में कई तरह के स्क्रीन गार्ड
स्मार्टफोन की स्क्रीन फोन के सबसे महत्वपूर्ण और महंगे हिस्सों में से एक होती है। इसे खरोंच, टूटने और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए लोग टेम्पर्ड ग्लास या दूसरे स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाते हैं।
कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
नए प्रावधान लागू होने के बाद स्क्रीन प्रोटेक्टर बनाने वाली कंपनियों को निर्धारित भारतीय मानक का पालन करना होगा। इसके अलावा जहां लागू हो, वहां उत्पाद और निर्माता को BIS रजिस्ट्रेशन से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसका सीधा असर स्क्रीन प्रोटेक्टर बनाने और बेचने वाले कारोबारियों पर पड़ेगा। उन्हें नए नियमों के अनुसार अपने उत्पाद और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना होगा।