IWT: ‘पाकिस्तान फायदे में रहेगा..’, सिंधु जल संधि फ्रेश डील; BJP MP बोले- भारत कभी कूटनीति से पीछे नहीं हटा

नई दिल्ली: सिंधु जल समझौता रुकने से पाकिस्तान में बहुत ही छटपटाहट है। उसने इस समझौते को फिर से शुरू करवाने के लिए भारत पर दबाव बनाने के अपने सारे हथकंडों का इस्तेमाल करके देख लिया। भारत अपने स्टैंड से इंच मात्र भी नहीं हिला। आतंकवाद बंद करो और फिर नए सिरे से सिंधु जल संधि पर चर्चा के लिए बैठो। केंद्र में सत्ताधारी मोदी सरकार के एक राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने एक विदेशी न्यूज चैनल के माध्यम से एकबार फिर से दुश्मन पड़ोसी तक यह दो टूक संदेश पहुंचा दिया है।

‘सिंधु समझौते पर बातचीत से पाकिस्तान को ही फायदा होगा’

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने रसिया टुडे को एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने सिंधु जल समझौते पर भारत के मौजूदा स्टैंड पर खुलकर बात की है। उन्होंने साफ किया कि 1960 में जिस नेक नीयत के साथ भारत ने खुद नुकसान झेलकर अच्छे पड़ोसी होने के नाते पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता किया था, वैसे हालात अब नहीं हैं। बीते 65-66 वर्षों में पाकिस्तान ने खुद ही भारत की सद्भावना की धज्जियां उड़ाकर अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारी है। उन्होंने कहा कि अब पाकिस्तान के पास एक ही विकल्प है। वह आतंकवाद छोड़े और नई डील के लिए बातचीत के टेबल पर आए।

मुझे लगता है कि अगर पाकिस्तान बातचीत के टेबल पर आए तो नई डील हो सकती है…परिस्थितियां बदल चुकी हैं और पाकिस्तान को यह बात समझनी पड़ेगी। मुझे लगता है कि बातचीत के टेबल पर आना पाकिस्तान के फायदे में ही रहेगा…।
सुजीत कुमार, राज्यसभा सांसद, बीजेपी

आतंकवाद के रहते सिंधु संधि भूल जाए पाकिस्तान

उन्होंने कहा कि भारत ने अपने हक और अधिकारों का त्याग करके बीते साढ़े छह दशकों तक पाकिस्तान को सिंधु जल का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा दिया और खुद के हिस्से में 19.48 फीसदी से भी कम हिस्सा रखा। बदले में भारत को क्या मिला, छद्म युद्ध और पाकिस्तान सरकार की ओर से प्रायोजित आतंकवाद। जब तक पाकिस्तान यह बंद नहीं करता, सिंधु जल समझौते को भूल जाए।

सिंधु जल पर नई डील के लिए पाकिस्तान को संदेश

केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी के सांसद ने बताया कि पाकिस्तान सोच रहा था कि वह आतंकवाद भी चलाएगा और हेग के परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में अपने हक में फैसला भी ले आएगा। जबकि, भारत ने न कभी इस आर्बिट्रेशन को मान्यता दी और जब उसने पाकिस्तान के पक्ष में एकतरफा आदेश दिया तो एक स्वयंप्रभू देश होने के नाते उसके आदेश को भी रद्दी को टोकरी में डाल दिया। भारत छद्म युद्ध और सरकार प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए किसी भी समझौते से नहीं बंधा हुआ है।

भारत कभी भी बातचीत और कूटनीति से पीछे नहीं हटा है…जब तक कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ बर्ताव नहीं करता है, छद्म युद्ध, आतंकवाद के जरिए भारत पर हमले नहीं कराता। इसलिए अगर पाकिस्तान भारत को टारगेट करना बंद करता है, अच्छे बर्ताव करता है, छद्म युद्ध बंद करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करता है, मुझे लगता है कि भारत नए समझौते के लिए बातचीत की मेज पर बैठने के लिए तैयार होगा।
सुजीत कुमार, राज्यसभा सांसद, बीजेपी

सिंधु जल समझौते से 10 बड़ी बातें

  1. सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ
  2. बाद में इस संधि के संचालन के लिए विश्व बैंक ने मध्यस्थ के रूप में प्रवेश किया।
  3. समझौते के तहत तीन पूर्वी नदियां रावी, ब्यास और सतलज का पानी भारत के हिस्से में आया, जो मात्र 19.48 फीसदी होता है।
  4. तीनों महत्वपूर्ण पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम का पानी पाकिस्तान के खाते में डाल दिया गया, जो कि 80 फीसदी से ज्यादा है।
  5. पश्चिमी नदियों पर भारत का अधिकार नाम मात्र का रह गया, जिसमें पाकिस्तान जब चाहे परेशानी खड़ा कर सकता था।
  6. बाद में आपसी विवाद को सुलझाने के नाम पर विश्व बैंक ने परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन बना दिया, जिसे न तो भारत ने कभी मान्यता दी और न ही उसकी कार्रवाइयों में हिस्सा लिया।
  7. सिंधु जल समझौते के शुरुआत से पाकिस्तान ने कभी भी उसको मिले पानी के हिस्से का पूर्ण उपयोग नहीं किया और ज्यादातर हिस्सा बहकर समुद्र में गिरकर बर्बाद होता रहा।
  8. ठीक उलट भारत ने जब भी सीमित मिले हिस्से के पानी के भी बेहतर उपयोग की कोशिशें कीं तो पाकिस्तान ने समझौते के नाम पर उसमें अड़ंगा डाला।
  9. सिंधु जल संधि की बुनियाद ही सद्भावना की नीयत से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने बदले में शुरू से ही भारत पर युद्ध थोपे, छद्म युद्ध लड़ता रहा और आतंकवादियों के दस्ते भेजकर भारत में बड़ी-बड़ी आतंकवादी वारदातों को अंजाम देता रहा।
  10. 22 अप्रैल, 2025 को जब जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने 25 सैलानियों की धर्म पूछकर बेरहमी से हत्या कर दी और एक घोड़े वाले को भी मार डाला तब भारत ने सिंधु जल समझौते पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया।
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