भोपाल। महिलाएं शाम को घर से बाहर न निकलें, सुनसान रास्तों से बचें या कपड़ों को लेकर सतर्क रहें… सुरक्षा के नाम पर ऐसी बंदिशें आखिर महिलाओं पर ही क्यों लगाई जाती हैं? इसी सवाल के साथ शुक्रवार शाम 300 से ज्यादा महिलाएं और युवतियां सड़क पर उतरीं। उन्होंने कमला पार्क से गैमन मॉल तक पैदल मार्च निकाला।
इस मार्च में बेटियों के साथ उनकी मां भी शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बंदिशें महिलाओं पर लगाने के बजाय पुरुषों की सोच बदलने और शहर को सुरक्षित बनाने की जरूरत है।
संयोजक बोलीं- बेटों की सोच सुधारने की जरूरत
प्रदर्शन की संयोजक विदुषी ने कहा कि हमसे शाम 6-7 बजे के बाद पार्क या दूसरी जगहों पर नहीं जाने को कहा जाता है। सवाल यह है कि पाबंदी हमेशा लड़कियों पर ही क्यों लगाई जाती है? हमें घर में रोकने के बजाय लड़कियों पर भद्दे कमेंट करने वालों की सोच बदलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बेटियों पर पाबंदी लगाने की नहीं, बल्कि बेटों की सोच सुधारने की जरूरत है। गलत कमेंट करने वालों को अब मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। मार्च के दौरान महिलाओं ने नारे भी लगाए। उन्होंने कहा- हमें डर में जीना नहीं, अपने हक से झुकना नहीं।
समाज नहीं सुधरा तो और प्रदर्शन होंगे
एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया को बताया कि दिल्ली में हो रहे आंदोलन की चिंगारी भोपाल और अन्य जिलों तक पहुंच चुकी है। महिलाओं और युवतियों पर भद्दे कमेंट किए जाते हैं। छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं होती हैं। इसके बाद भी पाबंदी हम पर ही लगाई जाती है।
उन्होंने कहा कि पुरुष समाज में सुधार किए जाने की कोई मांग नहीं उठती है। इसलिए भोपाल में महिलाओं ने बड़ी संख्या में प्रदर्शन किया है। जब तक समाज में सुधार नहीं आता, तब तक आगे अन्य जिलों में भी प्रदर्शन किए जाएंगे।