प्रदीप तिवारी, नई दिल्ली: कुछ बरस पहले तक मां-बाप यह सोच कर चिंतित रहते थे कि बच्चा इंटरनेट पर क्या देखता है? सोशल मीडिया पर किससे बातें करता है? फोन पर कितना समय बिताता है? अब इसमें एक नई फिक्र जुड़ गई है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से क्या पूछता है और बदले में उसे क्या जवाब मिलता है।
AI से बातचीत। कॉमन सेंस मीडिया ने अमेरिका में 13 से 17 साल तक के बच्चों पर एक सर्वेक्षण किया। इसमें पता चला कि सर्वे में शामिल 72% ने कम से कम एक बार कंपैनियनशिप के लिए यानी इंसानों जैसी बातचीत के लिए AI चैटबॉट यूज किया है। 52% ऐसा नियमित करते हैं। सर्वे में शामिल एक तिहाई बच्चों ने बताया कि सोशल टॉपिक, फ्रेंडशिप, इमोशनल सपोर्ट या रोमांटिक बातचीत के लिए वे AI का इस्तेमाल करते हैं।
इसमें वे समय सीमित कर सकते हैं और सुरक्षा से जुड़े अलर्ट पा सकते हैं। इसके अलावा मेटा, गूगल और कैरेक्टर AI ने भी ऐसे फीचर्स लाए हैं। लेकिन, सवाल फीचर नहीं, उसके असर का है।
दुनियादारी समझना जरूरी। AI की खासियत यही है कि वह आपके लिए हर वक्त मौजूद है। एक ही सवाल के कई बार जवाब देती है। टीनेजर्स के मामले में उसकी यह खूबी जोखिम बन सकती है। इसे ऐसे समझिए, कोई बच्चा अपने स्कूल में झगड़ा कर आया है और परिवार को बताने के बजाय AI से अपनी परेशानी साझा कर रहा है। शुरू में तो यह ठीक लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे हर तरह के इमोशनल सपोर्ट के लिए अगर वह AI का रुख करे, तब समस्या गंभीर हो सकती है।
कई चुनौतियां। टीनेजर्स के लिए सुरक्षा मुहैया कराने में AI को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बड़ी समस्या एज वेरिफिकेशन की है। इंटरनेट की दुनिया में उम्र की पुष्टि करना आसान नहीं होता। OpenAI भी उम्र के अनुमान को पूर्ण व्यवस्था नहीं मानता। इसके अलावा, बातचीत समझना भी एक चुनौती है। बच्चा बड़ी से बड़ी परेशानी को कैसे बताता है, यह पता नहीं है। AI को यही पहचानने की जरूरत है कि सामान्य दिखने वाली बातचीत के पीछे कोई गंभीर खतरा तो नहीं।
बदलनी होगी भूमिका। दुनिया के मुकाबले भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट बहुत सस्ता है और इसकी पहुंच भी काफी है। अब अधिकतर मोबाइल विनिर्माता AI फीचर पेश कर रहे हैं। लेकिन, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा कानूनों, नीतियों और मां-बाप की डिजिटल समझ के बीच बंटी है। इसलिए, सिर्फ पैरेंटल कंट्रोल ही समाधान नहीं। मां-बाप को भी अपनी भूमिका बदलनी होगी।
पूरी जानकारी। AI साक्षरता का मतलब सिर्फ अच्छा प्रॉम्प्ट लिखना नहीं। बच्चों को यह जानना होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उनके सवालों का जवाब कैसे बनाती है। वह कैसे और क्यों गलती करती है, उसे निजी जानकारी देने से क्यों परहेज करना चाहिए और जीवन के किसी मोड़ पर इमोशनल सपोर्ट के लिए AI के बजाय भरोसेमंद इंसान का होना क्यों जरूरी है।
सुरक्षा पर चर्चा। यह सच है कि AI को अब डिब्बे में बंद नहीं किया जा सकता। इसलिए, बच्चों को रोकने के बजाय विमर्श इस पर हो कि उन्हें कैसे जागरूक किया जाए और AI के साथ सुरक्षित कैसे रखा जाए।