न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पार्वथनेनी ने गांधी जयंती और ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के मौके पर भारतीय पायलट कैप्टन स्मिथ मछार (Captain Smit Machchhar) के अदम्य साहस को सलाम किया है। उन्होंने बताया कि कैसे कैप्टन स्मित ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बड़े विमान हादसे को टाला और 180 यात्रियों की जिंदगी बचाई।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय राजदूत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कैप्टन स्मित से वीडियो कॉल पर बात की और उनके इस असाधारण कदम को महात्मा गांधी के ‘अहिंसा’ सिद्धांत का सच्चा प्रतीक बताया। कैप्टन स्मित ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान के दौरान अपने ही को-पायलट के हमले को अपनी बहादुरी से नाकाम कर 180 लोगों की जान बचाई थी।
को-पायलट ने किया हमला पर कैप्टन ने नहीं खोया आपा
यूएन में भारतीय राजदूत पर्वथानेनी ने कहा कि पायलट का यह साहसी काम महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का ‘सच्चा उदाहरण’ है। भारतीय दूत ने कहा ‘मैं यह भी बताना चाहूंगा कि आज सुबह भारत में मेरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईदुबई एयरक्राफ्ट के बहादुर भारतीय पायलट से बात की। इस पायलट ने अपनी जान जोखिम में डालकर और खुद को भारी नुकसान पहुंचाते हुए फ्लाइट और बड़ी संख्या में यात्रियों की जान बचाई जिससे फ्लाइट सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित रूप से लैंड हो सकी।’
पीएम मोदी से बात करते हुए भावुक हुए कैप्टन
भारतीय दूत ने कहा कि पीएम मोदी ने कैप्टन मछार से कहा था कि गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर उनके काम अहिंसा का असली उदाहरण थे। भारतीय स्थायी प्रतिनिधि ने कहा ‘मेरे प्रधानमंत्री ने कहा कि चूंकि यह गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस था इसलिए पायलट स्मित मछार का काम अहिंसा के सिद्धांत का सच्चा उदाहरण था। उन पर हमला हो रहा था फिर भी उन्होंने न सिर्फ उसे सहा, बल्कि बहादुरी और हिम्मत दिखाते हुए यह सुनिश्चित किया कि फ्लाइट सुरक्षित जगह पर पहुंचे और उनकी देखरेख में मौजूद सभी यात्री सुरक्षित रहें।’
UN में गूंजा बापू का संदेश और ‘शांति’ का मंत्र
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों और तनाव के माहौल में गांधीजी के विचार पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने भारत के UN सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के मोटो ‘SHANTI’ (Securing Holistic Advancement Through Norms, Trust and Integrity) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिंसा सिर्फ युद्ध में ही नहीं, बल्कि गरीबी और असमानता में भी होती है और इससे निपटने का सबसे मजबूत हथियार अहिंसा ही है।