नई दिल्ली: सूचना का अधिकार के तहत हुए हालिया खुलासे के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर निर्वाचन आयो के आंतरिक कामकाज में दखल देने से इनकार कर दिया था। पारदर्शिता कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा (रिटायर्ड) द्वारा दायर एक RTI के जवाब में यह सामने आया कि कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्तों के पत्रों को उनकी व्यक्तिगत हैसियत में भेजा गया माना था, न कि पूरे चुनाव आयोग की ओर से एक आधिकारिक तौर पर। हालांकि इन्हें पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
ये चिट्ठी उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग से जुड़े थे
RTI अधिनियम के तहत बत्रा के साथ साझा किए गए रिकॉर्ड के अनुसार, 5 अगस्त को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने दोनों चुनाव आयुक्तों (ECs) को पत्र लिखकर उनके संदेश मिलने की पुष्टि की। चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए ये संदेश उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग से जुड़े थे।
मनीष गर्ग ने चुनाव आयुक्तों से चर्चा किए बिना ही आदेश जारी किया था
दोनों मुख्य चुनाव आयुक्तों ने अपने संदेशों में कहा कि ऐसा तब हुआ, जब सभी संबंधित अधिकारियों को बार-बार मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे कि वे ECI से पहले चर्चा किए या उसकी मंजूरी लिए बिना ऐसा कोई कदम न उठाएं। कैबिनेट सचिवालय की टिप्पणियों में कहा गया है कि भले ही गर्ग की नियुक्ति कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा की गई थी, लेकिन अब वे ECI के अधिकारी हैं, और उनके काम तथा आचरण को ECI के नियमों और दिशानिर्देशों के तहत नियंत्रित और मॉनिटर किया जाना है।
यह कदम 2023 के अधिनियम की धारा 18 के विरुद्ध
वहीं, आयुक्तों का कहना था कि यह कदम 2023 के अधिनियम की धारा 18 के विरुद्ध है, जबकि कैबिनेट सचिवालय ने इन्हें व्यक्तिगत पत्र मानते हुए ईसीआई के आंतरिक मामलों में दखल देने से इंकार किया और कार्रवाई को अनुचित बताया।