एमपी में शिल्पशास्त्र का अनोखा चमत्कार, 1100 साल पुराने एक ही स्तंभ में शिव के 5 और विष्णु के 4 रूप, संग्रहालय में संरक्षित

भोपाल। भारतीय मंदिर और मूर्तिकला परंपरा में देवी-देवताओं के अनेक रूपों का अंकन मिलता है, लेकिन एक ही प्रस्तर स्तंभ पर शिव और विष्णु के विभिन्न स्वरूपों को इतनी कलात्मकता से उकेरा जाना इसे विशेष बनाता है।देवबड़ला से जुड़ी इस एकाश्म (एक ही पत्थर से बनी) शिल्पकृति में स्तंभ के ऊपरी हिस्से में सदाशिव के पांच स्वरूपों का निरूपण है, जबकि नीचे चारों दिशाओं में बने अलंकृत ताकों में विष्णु के चार रूप विराजमान हैं।

चार दिशाओं की ओर से दिखाई देने वाले चार मुख

इस प्रस्तर स्तंभ का ऊपरी हिस्सा सदाशिव के रूप में बनाया गया है। इसमें चार दिशाओं की ओर से दिखाई देने वाले चार मुख हैं, जबकि पांचवां स्वरूप शीर्ष पर प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है। चार मुखों की पहचान क्रमश: पूर्व में तत्पुरुष, उत्तर में वामदेव, दक्षिण में अघोर और पश्चिम में सद्योजात के रूप में की गई है। शीर्ष पर पांचवां स्वरूप ईशान है।

पांचों स्वरूपों को अलग-अलग भाव-भंगिमा और पारंपरिक आभूषणों के साथ उकेरा गया है। जटामुकुट, कुंडल और अन्य अलंकरण इन मुखों की शिल्पगत विशेषता को और उभारते हैं। शिल्पशास्त्रीय परंपरा में सदाशिव के ये पांच स्वरूप भगवान शिव के व्यापक और सर्वव्यापी स्वरूप का प्रतीक माने जाते हैं।

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