शराब की लत और इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट? बीमा कंपनी को लगी फटकार

नई दिल्ली: आपने कई बार देखा होगा कि जरूरत पड़ने पर जब किसी बीमा कंपनी से इंश्योरेंस क्लेम (बीमा दावा) किया जाता है तो वह कई बार रिजेक्ट भी हो जाता है। ऐसे में लोग कानून का भी सहारा लेते हैं। इस बीच महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां कंज्यूमर कमीशन ने एक मामले में बड़ा आदेश देते हुए बताया है कि अगर बीमा लेने वाला व्यक्ति पॉलिसी लेने से पहले शराब पीने की लत का खुलासा कर दिया है तो उसका बीमा क्लेम इंश्योरेंस कंपनी रिजेक्ट नहीं कर सकती है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

क्लेम को खारिज करना सर्विस में कमी- आयोग

न्यूज एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार, नागपुर उपभोक्ता आयोग (कंज्यूमर कमीशन) ने एक लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को एक विधवा को 50 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान करने का आदेश दिया है। कमीशन ने कहा कि पॉलिसी खरीदने से पहले ही शराब पीने की आदत के बारे में बताने के बावजूद क्लेम को खारिज करना सर्विस में कमी माना जाएगा।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का हवाला देते हुए जिनमें हाइपरटेंशन और डायबिटीज मेलिटस को लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां बताया गया है, फोरम ने कहा कि सिर्फ इसलिए क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति ने पॉलिसी लेने से पूर्व इन पहले से मौजूद बीमारियों का जिक्र नहीं किया था।

बीमा कंपनी ने क्लेम क्यों किया था रिजेक्ट?

मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महीने एक आदेश में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (नागपुर) ने एडलवाइस टोकियो लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को शिकायतकर्ता के पति के कानूनी रूप से देय बीमा दावे को खारिज करने के लिए सेवा में कमी का दोषी ठहराया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके पति ने अप्रैल 2021 में बीमा कंपनी की पॉलिसी खरीदी थी। 26 जनवरी 2023 को अचानक हुई उनकी मौत के बाद, उनकी पत्नी ने बीमा दावा दायर किया।

हालांकि, बीमा कंपनी ने बाद में दावा खारिज कर दिया, पॉलिसी रद्द कर दी और सितंबर 2023 में 18,713 रुपये का प्रीमियम रिफंड चेक भेजा। इसके बाद महिला ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का रुख किया। इस दौरान उसने मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजे के साथ-साथ दावा भी किया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना तर्क देते हुए कहा कि मृतक ने लंबे समय से अपनी शराब की लत, हाई बीपी और डायबिटीज की जानकारी को छिपाया था।

आयोग ने क्या सुनाया फैसला?

वहीं, आयोग ने बताया कि 20 मई 2021 को पॉलिसी जारी होने से पहले जमा किए गए मेडिकल टेस्ट फॉर्म में स्पष्ट रूप से लिखा था कि पॉलिसीधारक, "पिछले 15 वर्षों से महीने में दो बार 90 मिलीलीटर व्हिस्की का सेवन करता था।" इसके अलावा आयोग ने यह भी बताया कि बीमा कंपनी के पैनल डॉक्टर द्वारा किए गए पूर्व पॉलिसी मेडिकल टेस्ट में हाई बीपी या मधुमेह का उल्लेख नहीं था।

इस दौरान आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, "नतीजतन, भले ही पॉलिसी लेने से पहले यह साफ तौर पर बताया गया था कि शिकायतकर्ता के पति शराब/व्हिस्की का सेवन करते हैं, फिर भी यह स्पष्ट है कि दूसरी पार्टी ने शिकायतकर्ता के पति के कानूनी रूप से देय बीमा दावे को खारिज करके सेवा में कमी की है।"

इसके बाद आयोग ने कंपनी को महिला को 50 लाख रुपये की दावा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया, साथ ही 30 सितंबर, 2023 से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देने को कहा। आयोग ने बीमा कंपनी को शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए अतिरिक्त 10,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।

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