हर साल करीब 30-35 प्रतिशत सीटें रह जाती हैं खाली:बीयू प्रदेश का अकेला विवि जहां ई-प्रवेश

भोपाल,बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में हर साल करीब 30-35% सीटें खाली रह जाती हैं। बीएएलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर, एमए साइकोलॉजी, एमए योग साइंस जैसे कोर्सेस तो फुल रहते हैं लेकिन एमए समाजशास्त्र, एमएससी फिजिक्स, एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स आदि में स्टूडेंट्स रुचि नहीं दिखाते। लिहाजा, विवि प्रशासन ने कैंपस में संचालित यूजी-पीजी कोर्सेस की सीटें भरने के लिए नई पहल की है।

अगले सत्र से विवि उच्च शिक्षा विभाग की सेंट्रलाइज्ड एडमिशन काउंसिल ‘ई-प्रवेश’ में शामिल होगा। यानी बीयू में प्रवेश के तीन माध्यम होंगे। पहला, ई प्रवेश; दूसरा सीयूईटी स्कोर के आधार पर यूनिवर्सिटी लेवल काउंसलिंग और खाली सीट रहने पर 12वीं या स्नातक स्तर के रिजल्ट के आधार पर विवि स्तर पर क्वालिफाइंग राउंड। मप्र में बीयू ऐसा करने वाला अकेला विवि होगा।

कुलगुरु प्रो. एसके जैन का कहना है कि तीनों व्यवस्था समन्वय से लागू करेंगे। सीयूईटी वालों के लिए 25% सीटें आरक्षित रहेंगी। इनमें प्रवेश विवि स्तर पर आयोजित काउंसलिंग से और शेष 75% सीटों पर ई-प्रवेश से एडमिशन होगा। खाली सीट पर एक और राउंड विवि स्तर पर होगा। हालांकि बीएएलएलबी-बीएससी एग्रीकल्चर जैसे कोर्स में प्रवेश सिर्फ सीयूईटी स्कोर पर और एमबीए, बीबीए, बीटेक जैसे कोर्सेस में तकनीकी शिक्षा विभाग की काउंसलिंग से ही होगा।

नए सिस्टम से छात्रों की बढ़ेगी सुुविधा

नई व्यवस्था से परंपरागत कोर्सेस में प्रवेश लेने के इच्छुक स्टूडेंट्स को भी सुविधा होगी, क्योंकि उन्हें एक के बाद एक तीन विकल्प मिलेंगे। यदि सीयूईटी स्कोर और उच्च शिक्षा विभाग की काउंसलिंग में प्रवेश नहीं मिलता है तो क्वालिफाइंग राउंड से विवि स्तर पर प्रवेश ले सकेंगे। हालांकि, सीटों में आरक्षण लागू करने की चुनौती रहती है।

जानकार बोले- शिक्षा की गुणवत्ता भी सुधारें

इधर, जानकारों का कहना है, सीयूईटी जैसी परीक्षा के जरिए भी पर्याप्त छात्र बीयू का चयन नहीं कर रहे हैं, तो यह शैक्षणिक गुणवत्ता पर सवाल है। विश्वविद्यालय को शिक्षण, रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर ठोस सुधार करने होंगे। बीयू के यूटीडी में फिलहाल करीब 52 यूजी और पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग दो हजार सीटें हैं।

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