खराब मौसम के चलते 2 दिन में सिमटा शेड्यूल, रोइंग टीम में रातों-रात बदलाव पर मचा बवाल

आइची-नागोया: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय रोइंग टीम के क्रू कॉम्बिनेशन में अचानक किए गए फेरबदल को लेकर उठा विवाद गहराता जा रहा है। एथलीटों की बढ़ती नाराजगी के बीच भारतीय रोइंग महासंघ के अध्यक्ष बालाजी मारडपा ने संघ के इस कदम का कड़ा बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खराब मौसम के कारण चार दिनों के पूरे रोइंग कार्यक्रम को दो दिनों में समेटना पड़ा, जिसके बाद देश के लिए ज्यादा से ज्यादा मेडल पक्के करने के उद्देश्य से यह बदलाव बेहद जरूरी हो गया था। गौरतलब है कि कई टॉप भारतीय रोवर्स उन इवेंट्स से हटाए जाने पर सख्त असहमत दिखे, जिनकी वे महीनों से तैयारी कर रहे थे और जिनमें उनकी आधिकारिक एंट्री हो चुकी थी।

RFI अध्यक्ष ने कही ये बात

RFI अध्यक्ष ने खिलाड़ियों के विरोध को खारिज करते हुए बेहद सख्त और स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘रेसिंग चार दिनों की होनी तय थी, लेकिन खराब मौसम और कोर्स तैयार न होने से 4 दिन का पूरा शेड्यूल 2 दिनों में निचोड़ना पड़ा। ऐसे में देश के हित में बड़े मेडल जीतने के लिए हमें यह बदलाव करना ही था। मैं किसी ब्रॉन्ज मेडल की बात नहीं कर रहा, हमारा सीधा लक्ष्य सिर्फ सिल्वर और गोल्ड हासिल करना है।"

उन्होंने 2,000 मीटर की बेहद थकाऊ रेस में एथलीटों के स्टैमिना का हवाला देते हुए फुटबॉल का उदाहरण दिया। मारडपा बोले, ‘आप फुटबॉल के मैदान में लगातार कितनी बार स्प्रिंट मार सकते हैं? 5 बार, 6 बार या 8 बार? उसके बाद भले ही आपका दिमाग भागना चाहे, लेकिन आपके पैर जवाब दे देंगे और आप वहीं गिर पड़ेंगे। इस छोटे शेड्यूल में पुराने कॉम्बिनेशन के साथ उतरना आत्मघाती होता।’

विदेशी एक्सपर्ट एंथनी पैटरसन की रिपोर्ट पर लगी मुहर

RFI चीफ ने खुलासा किया कि यह फेरबदल मनमर्जी से नहीं, बल्कि टीम के विदेशी मुख्य विशेषज्ञ एंथनी पैटरसन के कड़े निर्देशों पर किया गया है। मारडपा के अनुसार, पैटरसन का रुख साफ था कि यदि भारत को गोल्ड या सिल्वर मेडल जीतना है, तो यही नया कॉम्बिनेशन परिणाम देगा। अगर सिर्फ ब्रॉन्ज से संतोष करना है, तो पुराने कॉम्बिनेशन से खेला जा सकता है।

टीम में हुए प्रमुख फेरबदल:

  • अरविंद सिंह को सिंगल स्कल्स से हटाकर क्वाड्रपल स्कल्स (Quadruple Sculls) में ट्रांसफर किया गया।
  • बलराज पंवार को अरविंद की जगह सिंगल स्कल्स की कमान सौंपी गई।
  • इसके अलावा डबल स्कल्स, पेयर और कॉक्सलेस फोर (Coxless Four) स्पर्धाओं में भी रोवर्स की अदला-बदली की गई।

खिलाड़ी मारडपा के लिए बच्चे जैसे

खिलाड़ियों के असंतोष पर तंज कसते हुए मारडपा ने कहा, ‘ये 20 से 27 साल के युवा खिलाड़ी हैं, मेरे बच्चों की तरह हैं। इनका सोचना होता है कि ‘वह मेरा बेस्ट फ्रेंड है, मैं उसी के साथ नाव चलाऊंगा।’ लेकिन एशियन गेम्स जैसे मंच पर यह बच्चों का खेल या दोस्ती निभाने की जगह नहीं है। हमें उन्हें समझाना होगा। केवल भारत ही नहीं, शेड्यूल छोटा होने पर बाकी देशों ने भी अपने कॉम्बिनेशन बदले हैं।’

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