भोपाल में GIS फाउंटेन घोटाला : जिम्मेदार अफसरों के नाम और नुकसान का हिसाब गायब, नगरीय प्रशासन ने मांगा जवाब

भोपाल । जीआईएस के दौरान शहर में लगाए गए फाउंटेन के कथित घोटाले की जांच में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर अब नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

निगम की जांच समिति ने स्वीकृत कार्य के मुकाबले कमियां तो दर्ज कर दीं, लेकिन इन कमियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों का नाम नहीं बताया और न ही सरकारी खजाने को हुई आर्थिक क्षति का हिसाब लगाया।

जांच रिपोर्ट में गोलमाल

इससे भी बड़ा सवाल यह है कि समिति ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष के बिंदु क्रमांक पांच में खुद लिखा है कि समिति द्वारा प्रस्तुत तथ्यात्मक प्रतिवेदन पर नगर पालिक निगम भोपाल का प्रतिउत्तर प्राप्त किया जाना प्रस्तावित है।
यानी जिस निगम के काम से जुड़ा मामला है, उसका जवाब लेना अभी बाकी था, फिर भी जांच रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई।
बता दें कि जीआईएस के दौरान शहर में लगाए गए फाउंटेन के कथित घोटाले को लेकर अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग और प्रभारी कार्यपालन यंत्री आरके त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत की गई थी।
इस पर पहली जांच अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग द्वारा किए जाने के बाद लोकायुकत ने इसे मानने से इन्कार कर दिया था और नए सिरे से जांच कराने के लिए कहा था।
इसके बाद संचालनालय ने एक अप्रैल को मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी। समिति की जांच रिपोर्ट आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को भेजी गई। इसके बाद विभाग ने 19 अगस्त को निगम आयुक्त को पत्र भेजकर रिपोर्ट की खामियां गिनाईं।

विभाग ने निगम से मांगा तथ्यात्मक प्रतिवेदन

विभाग की उप संचालक एकता अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि स्थल निरीक्षण में स्वीकृत कार्य के विरुद्ध कमियां पाए जाने का उल्लेख है, लेकिन इनके लिए उत्तरदायी अधिकारियों-कर्मचारियों के संबंध में स्पष्ट लेख नहीं किया गया।
आर्थिक क्षति के बारे में भी रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है। विभाग ने अब निगम से तथ्यात्मक प्रतिवेदन पर प्रतिउत्तर प्राप्त करने के लिए आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है।

कमियां दर्ज, लेकिन जिम्मेदारी से किनारा

फाउंटेन के काम में गड़बड़ियों की जांच करने वाली समिति ने कमियां तो दर्ज कर दीं, लेकिन यह नहीं बताया कि इनके लिए कौन जिम्मेदार है और निगम को कितना नुकसान हुआ।
ऐसे में जांच की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब समिति खुद मान रही है कि उसके तथ्यात्मक प्रतिवेदन पर निगम का जवाब लिया जाना अभी प्रस्तावित है।
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