होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, 30 से 90 साल तक की लीज पर मिलेगी सरकारी जमीन

भोपाल। प्रदेश में औद्योगिक निवेश, पर्यटन विकास तथा लोकहित की विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लैंड बैंक निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसकी शुरुआत भोपाल जिले से की गई है, जहां राजस्व विभाग द्वारा लैंड बैंक तैयार करने का कार्य अंतिम चरण में है।

इस व्यवस्था के तहत राजस्व भूमि का संपूर्ण डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है, जिसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा व प्रशासनिक स्तर पर इसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।

पिछले वर्ष आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) के बाद राज्य शासन के निर्देशानुसार राजस्व विभाग ने लैंड बैंक तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की थी। इसका उद्देश्य औद्योगिक निवेशकों, पर्यटन क्षेत्र और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाना है।

भोपाल से शुरू हुआ ‘लैंड बैंक’ का महाअभियान

जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन, नगरीय प्रशासन, पर्यटन विभाग व अन्य संबंधित विभागों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राजस्व विभाग द्वारा निवेशकों के समक्ष लगभग 250 एकड़ भूमि वाले लैंड बैंक की जानकारी प्रस्तुत की जाएगी।
यह भूमि भोपाल से लगभग 200 किलोमीटर के दायरे में स्थित है, जहां छोटे एवं मध्यम निवेशकों द्वारा होटल, रिसार्ट तथा पर्यटन आधारित परियोजनाओं में 60 करोड़ रुपये तक का निवेश किए जाने की संभावना है।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने रायसेन, विदिशा, बैतूल, नरसिंहपुर सहित प्रदेश के 25 स्थानों के लिए ओपन टेंडर जारी किए थे। पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार निवेशकों को भूमि 30 से 90 वर्ष तक की दीर्घकालीन लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी।

इन जगहों पर आरक्षित की गई है जमीन

लैंड बैंक के अंतर्गत रायसेन जिले के मुरलीखेड़ी में दो हेक्टेयर व ढकना-चपना में 4.65 हेक्टेयर भूमि पर्यटन परियोजनाओं के लिए आरक्षित की गई है। वहीं, विदिशा के कागपुर व नेहरयाई और बैतूल के बोथिया क्षेत्र में भी होटल, रिसार्ट विकास के लिए भूमि चिह्नित की गई है। इन स्थलों पर पांच करोड़ रुपये तक के न्यूनतम निवेश का प्रविधान रखा गया है।

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