भारत बोला- पाकिस्तान अल्पसंख्यकों पर हमें नसीहत न दे:PAK का आरोप- फर्जी मुठभेड़ में कश्मीरी मर रहे, उन्हें सम्मान से दफनाने का हक भी नहीं

संयुक्त राष्ट्र (UN) में गुरूवार को भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक आजादी और मानवाधिकारों को लेकर तीखी बहस हुई। भारत ने पाकिस्तान पर अपने धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा नहीं करने का आरोप लगाया।

भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या घट रही है और उनके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर सकता, उसे भारत को नसीहत देने का कोई हक नहीं है।

इसके पहले पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर में लोग फर्जी मुठभेड़ों में मारे जा रहे हैं। उन्हें सम्मान के साथ दफनाने का हक भी नहीं दिया जाता।

भाविका मंगलानंदन ने यह बात UN की एक रिपोर्ट को लेकर कही। रिपोर्ट में कोरोना के दौरान शवों को दफनाने और धार्मिक रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार करने में आई दिक्कतों के लिए विकासशील देशों को जिम्मेदार ठहराया गया था।

भारत पर पाकिस्तान ने क्या आरोप लगाया था?

भारत में मुस्लिमों का मुद्दा: भारत में मुस्लिमों को निशाना बनाया जाता है और उनके खिलाफ हिंसा होती है।

धार्मिक आजादी की रिपोर्ट: UN की विशेष रिपोर्टर से धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर कब्जे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों की स्थिति पर रिपोर्टिंग जारी रखने की अपील की।

भारत ने रावलाकोट में हुई हिंसा का मुद्दा उठाया

भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के रावलाकोट में हुई हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने पाकिस्तान से सवाल किया कि जब वह भारत में मानवाधिकारों की बात करता है, तो उसे अपने नियंत्रण वाले इलाकों में लोगों के साथ हो रहे बर्ताव पर भी ध्यान देना चाहिए।

रावलाकोट में इस साल जून में राजनीतिक अधिकारों और विधानसभा की 12 सीटों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। ये सीटें भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। प्रदर्शनकारी इन सीटों को खत्म करने की मांग कर रहे थे।

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और लोगों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, 7 जून को हुई झड़पों में कम से कम 8 प्रदर्शनकारियों और 4 पुलिसकर्मियों की मौत की पुष्टि पुलिस ने की थी। इसके बाद भी इलाके में तनाव बना रहा।

भारत ने कारगिल जंग की याद दिलाई

भाविका मंगलानंदन ने 1999 की कारगिल जंग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस युद्ध में पाकिस्तान ने अपने मारे गए कुछ सैनिकों के शव लेने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों को पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया था।

भारत ने इस उदाहरण के जरिए कहा कि मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना जरूरी है। किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव और अंतिम संस्कार से जुड़े अधिकारों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

भारत ने आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों पर भी सवाल उठाए

भाविका मंगलानंदन ने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आतंकवादी निर्दोष लोगों की जान लेते हैं और उनके परिवारों के साथ पूरे समाज को मानसिक चोट पहुंचाते हैं।

उन्होंने सवाल किया कि आतंकवादियों के अधिकारों की पैरवी तो जोर-शोर से की जाती है, लेकिन आतंकवादी हमलों में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों और उनके परिवारों के अधिकारों पर उतना ध्यान क्यों नहीं दिया जाता।

भारत का कहना था कि मानवाधिकारों की चर्चा करते समय आतंकवाद के पीड़ितों के साथ हुए अन्याय को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

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