किसी भी संगठन की पहचान उसका लोगो होता है। भारतीय रेल का भी एक लोगो है। इसके केंद्र में है एक WG स्टीम इंजन और कुछ सितारे। ये सितारे भारतीय रेल के विभिन्न क्षेत्रीय रेल का प्रतिनिधित्व करते हैं। बरसों बाद अब रेलवे का लोगो फिर से बदलने जा रहा है। रेलवे को क्यों बदलना पड़ा लोगो, इस बारे में हम आपको बता रहे हैं।
Indian railway का बदल रहा है लोगो, रेल मंत्रालय की मिल गई अनुमति, क्यों बदलना पड़ा जानिए यहां
इंडियन रेलवेज (Indian Railways) या भारतीय रेल की वर्षों पुरानी पहचान अब बदलने जा रही है। अपनी परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को सहेजने वाली रेलवे ने अपने आधिकारिक लोगो (चिह्न) में एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब तक रेलवे के लोगो में नजर आने वाले 17 सितारों की जगह अब 18 सितारे अपनी चमक बिखेरेंगे।
भारतीय रेल को चलाने की जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड (Railway Board) की है। यह सीधे रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) के नियंत्रण में काम करता है। पिछले सप्ताह ही रेलवे बोर्ड ने भारतीय रेल के लोगों को बदलने का निर्णय ले लिया है। रेलवे बोर्ड के दस्तावेज के मुताबिक रेलवे का नया लोगो एक जून 2026 से अमल में आ जाएगा। इसी के साथ देशभर में रेलवे की नई पहचान स्थापित हो जाएगी।
भारत सरकार ने देश में रेलवे का एक नया जोन बनाने का फैसला किया है। यह नया जोन रेलवे का 18वा जोन है। इसका नाम है दक्षिण तट रेलवे (South Coast Railway) है। इस जोनल रेलवे (SCoR) का मुख्यालय आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा (Vijayawada) में है। यह जोनल रेलवे आगामी एक जून से फंक्शनल हो रहा है। यह रेलवे का 18वां जोन है। रेलवे के लोगो में इसी जोन का प्रतिनिधित्व देने के लिए लोगो का बदलाव किया जा रहा है।
रेलवे के लोगो के केंद्र में धुआं छोडता एक स्टीम इंजन है। इसके चारों तरफ कुछ सितारे हैं जो कि रेलवे के जोनल रेलवे का प्रतिनिधित्व करते हैं। साल 2003 से पहले तक इसमें नौ सितारे होते थे। उस समय अटल बिहारी बाजपेयी सरकार ने सात नए जोन का निर्माण किया था। उसी के साथ इसमें सितारों की संख्या बढ़ कर 16 हो गई थी। साल 2010 में मनमोहन सिंह सरकार ने मेट्रो रेलवे कोलकाता को एक अलग जोन के रूप में मान्यता दे दी। इसके बाद लोगों में सितारों की संख्या 17 हो गई। अब इसकी संख्या 18 हो रही है।