न्यूयॉर्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में हुए कार्यक्रम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कुछ धार्मिक नेताओं ने धोखे से कार्यक्रम में बुलाए जाने का आरोप लगाया है और कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी कि इसमें RSS चीफ मोहन भागवत शामिल होने वाले हैं। आरोप लगाने वाले धार्मिक नेताओं में से एक तो इस कार्यक्रम के मुख्य मंच पर भी पहुंचे थे।
क्वींस के जमैका मुस्लिम सेंटर के निदेशक इमाम शमसी अली भी नाश्ते में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि "मुझे कुछ हद तक धोखा महसूस हुआ।" सोशल मीडिया पर एक बयान में उन्होंने RSS चीफ के साथ अपनी मौजूदगी को लेकर माफी मांगी और सफाई दी।
निमंत्रण में मोहन भागवत का जिक्र नहीं
न्यूयॉर्क टाइम्स ने धार्मिक नेताओं को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजे गए एक दर्जन ईमेल की समीक्षा करने का दावा किया और कहा कि आयोजकों ने RSS या भागवत का कोई जिक्र नहीं किया था। मैनहट्टन में रिवरसाइड चर्च की सीनियर मिनिस्टर एड्रिएन थॉर्न मैडिसन स्क्वायर के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। थॉर्न ने कहा कि उन्होंने कार्यक्रम में एकता के बारे में बात की थी, लेकिन उन्हें RSS के शामिल होने की जानकारी नहीं दी गई थी।
भागवत का नाम छिपाने पर धार्मिक नेता नाराज
बुधवार को एक बयान में थॉर्न ने भागवत का नाम छिपाने के लिए उन्हें बुलाने वाले बावा जैन से नाराजगी जताई। थॉर्न ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि सुरक्षा कारणों से वक्ताओं की पूरी सूची निमंत्रण में नहीं दी जा सकी, जिसमें भागवत का नाम भी शामिल था। उन्होंने लोगों पर गुमराह करने का आरोप लगाया।
मोहन भागवत ने दिया था एकता का संदेश
शनिवार 29 अगस्त को मोहन भागवत ने एक विशाल समूह को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने विविधता में एकता को भारत की पहचान और भारतीयों के DNA का हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा कि इसके स्वीकार किया जाना चाहिए। इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसकी रक्षा की जानी चाहिए।
मोहन भागवत के कार्यक्रम के विरोध में आयोजन स्थल के बाहर धार्मिक और राजनीतिक समूहों से 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी जमा हुए थे। इनमें मुस्लिम और खालिस्तान समर्थक सिख कट्टरपंथी भी शामिल था। खालिस्तान समर्थन सिख कट्टरपंथियों के एक समूह ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फाड़ दिया था।