अदीस अबाबा: इथियोपिया के दौरे पर पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में सुधारों को लेकर अड़ंगा लगाने वालों पर जमकर बरसे। जयशंकर ने भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक साझेदारी को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि भारत और अफ्रीका ऐसी पुरानी वैश्विक व्यवस्था का सामना कर रहे हैं, जो अक्सर उनके हितों को नजरअंदाज करती है।
सुधारों में देरी पर बरसे जयशंकर
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार प्रक्रिया पर देरी को लेकर निशाना साधा और कहा कि सुधारों में देरी और बदलाव को कमजोर करने की जानबूझकर कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा, वैश्विक स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया में भारत और अफ्रीका का प्रतिनिधित्व न होना या कम प्रतिनिधित्व होना स्वीकार्य नहीं है।
जयशंकर ने बताया UNSC में सुधार का मकसद
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि सुधार का मकसद सिर्फ मौजूदा व्यवस्था में सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि वैश्विक शासन को ज्यादा लोकतांत्रिक, जवाबदेह और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना है। ताकि संयुक्त राष्ट्र को ज्यादा सक्षम और विश्वसनीय बनाया जा सके। उन्होंने अफ्रीका के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दोनों श्रेणियों में निष्पक्ष प्रतिनिधित्व की मांग की।
भारत-अफ्रीका संबंध हजारों साल पुराने
महाद्वीप के साथ जुड़ाव का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने भारत और अफ्रीका के संबंधों को हजारों साल पुराना बताया। उन्होंने कहा, भारत और अफ्रीका की विकास से जुड़ी उम्मीदें और ऐतिहासिक अनुभव एक जैसे हैं। इसके साथ ही दोनों एक ज्यादा न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जयशंकर ने दोनों के विकास लक्ष्यों का जिक्र किया और कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, "हम अपनी आजादी की 100वीं सालगिरह तक खुद को बदलना चाहते हैं। इसी तरह अफ्रीका ने एजेंडा 2063 के जरिए अपना विजन पेश किया है, जिसमें उस अप्रीका की रूपरेखा बताई गई है जिसे हम चाहते हैं।"