कंगना रनौत जल्द ही फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ में नजर आने वाली हैं, ने नर्सों की यूनिफॉर्म को लेकर अपनी राय खुलकर रखी है। उनका मानना है कि आज भी नर्सों के यूनिफॉर्म में ब्रिटिश दौर की झलक दिखाई देती है और अब समय आ गया है कि इसे भारतीय सोच, सुविधा और जरूरतों के अनुसार बदला जाए।
मुंबई में एएनआई से खास बातचीत के दौरान कंगना ने कहा कि डॉक्टरों को अपने प्रोफेशनल ड्रेस को लेकर कुछ हद तक स्वतंत्रता मिलती है, लेकिन नर्सें अब भी एक ऐसे ड्रेस कोड का पालन कर रही हैं जो उन्हें काफी हद तक विदेशी लुक लगता है।
‘मुझे लगता है कि ब्रिटिश नर्सों का ड्रेस कोड अभी भी लागू है’
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ब्रिटिश नर्सों का ड्रेस कोड अभी भी लागू है। हमारी नर्सें, डॉक्टरों की तरह, जो चाहें पहन सकती हैं, उनके लिए एक ड्रेस कोड होता है। लेकिन हमारी नर्सें, चाहे मौसम गर्म हो या ठंडा, एक तरह से विदेशी दिखती हैं। यह मेरी पर्सनल राय है। लेकिन इस फिल्म में हमने ईमानदारी और गरिमा के साथ काम किया है। आकार और कद मायने नहीं रखते, आपकी वर्दी आपका कर्तव्य है।’
कंगना बोलीं- नर्सों की ड्रेस भारतीय संस्कृति और उनकी सुविधाओं के मुताबिक हो
कंगना ने आगे कहा कि नर्सों की यूनिफॉर्म में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें जैसे टोपी, बेल्ट और पिन पुराने पश्चिमी सैन्य प्रभावों से प्रेरित हैं और वर्षों से इनमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘मेरे हिसाब से यह पूरा लुक काफी ब्रिटिश और पश्चिमी संस्कृति से जुड़ा हुआ लगता है। टोपी, बेल्ट और ऊपर लगाए जाने वाले पिन अमेरिकी नौसेना और युद्ध के समय वाले यूनिफॉर्म से प्रेरित थे। फर्स्ट और सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय यह स्टाइल काफी प्रचलन में था।’ कंगना का मानना है कि यदि नर्सें खुद महसूस करें कि उनकी यूनिफॉर्म में बदलाव की जरूरत है, तो भविष्य में इसे भारतीय संस्कृति और उनकी सुविधाओं के मुताबिक नया रूप दिया जा सकता है।
कंगना एक नर्स का किरदार निभा रही हैं
इस विषय पर आगे बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘अब तक इस ड्रेस में ज्यादा बदलाव नहीं हुए हैं। लेकिन आने वाले समय में अगर नर्सों की जरूरतों और उनकी पसंद के अनुसार इसे भारतीय स्वरूप दिया जाए और उपयोगी सुधार किए जाएं, तो यह एक अच्छा कदम साबित हो सकता है।’ फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता‘ में कंगना एक नर्स का किरदार निभा रही हैं। यह भूमिका एक ऐसी आम महिला की कहानी को सामने लाती है, जिसकी सेवा, करुणा और समर्पण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जबकि वह संकट के समय सबसे आगे खड़ी रहती है।
भयावह परिस्थितियों के बीच 400 से ज्यादा लोगों की जान बचाने में मदद
हाल ही में फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज किया गया, जिसमें एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी की झलक दिखाई गई है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म उन आम लोगों के साहस को दिखाती है, जिन्होंने भयावह परिस्थितियों के बीच 400 से ज्यादा लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
जो देश के कठिन दौर में चुपचाप लोगों की रक्षा करते रहे
यह फिल्म पारंपरिक हीरो की बजाय उन नर्सों और वार्ड बॉयज की कहानी पर रोशनी डालती है, जो देश के कठिन दौर में चुपचाप लोगों की रक्षा करते रहे। वास्तविक घटनाओं से प्रेरित यह कहानी हेल्थ वर्कर्स और सपोर्ट स्टाफ की उस अहम भूमिका को सामने लाती है, जिसके बिना व्यवस्था को संभालना लगभग असंभव होता। ‘भारत भाग्य विधाता’ को डॉ. जयंतीलाल गाडा के पेन स्टूडियोज प्रस्तुत कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण पेन स्टूडियोज, मणिकर्णिका फिल्म्स और परमहंस क्रिएशन्स ने यूनाइया फिल्म्स एलएलपी और फ्लोटिंग रॉक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से किया है।