इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर सियासत तेज, प्रशासन के रोड़े से कांग्रेस को मिला सियासी ऑक्सीजन

भोपाल। इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को स्थानीय भाजपा नेताओं का विरोध और प्रशासन द्वारा अनुमति से रोक एक तरह से पॉजिटिव पब्लिसिटी या ऑक्सीजन का काम कर रही है। इससे कांग्रेस नेता और उत्साहित नजर आ रहे हैं। उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार पर पक्षपात और जानबूझकर अनुमति रोकने का आरोप लगाया है। उल्लेखनीय है कि ‘छात्रों की गूंज’ अभियान कांग्रेस का देशव्यापी छात्र-संवाद कार्यक्रम है।

राहुल गांधी कई मुद्दों पर करेंगे बात

इसके तहत राहुल गांधी कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे के बाद अब इंदौर में छात्रों से परीक्षा पेपर लीक, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर सीधी बात करेंगे। यह कार्यक्रम इंदौर में पहले 12 सितंबर को प्रस्तावित था लेकिन कांग्रेस का दावा है कि उपयुक्त स्थान पर प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने से इसे स्थगित कर 19 सितंबर को करना तय किया गया है। कांग्रेस ने आयोजन स्थल के रूप में शहर के नेहरू स्टेडियम की मांग की थी, किंतु नगर निगम ने इसकी अनुमति नहीं दी।

कांग्रेस ने रजिस्ट्रेशन लिंक भी जारी कर दिया

इसके बाद अब यह संवाद ‘भारत जोड़ो मैदान’ में आयोजित किया जाएगा। स्थान बदलने के बाद कांग्रेस ने इसके लिए आधिकारिक रजिस्ट्रेशन लिंक भी जारी कर दिया है। उधर, भाजपा नेताओं और प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अंतर्गत स्टेडियम का उपयोग केवल खेल गतिविधियों या राज्य स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों के लिए ही किया जा सकता है। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने तर्क दिया कि गत आठ फरवरी को इसी नेहरू स्टेडियम में भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के बेटे रुद्राक्ष शुक्ला का यूथ वाक कार्यक्रम हुआ था।

दरअसल, अनुमति न मिलने के बाद कांग्रेस ने पीड़ित होने का विक्टिम कार्ड खेला और ऐसा नरैटिव बनाने का प्रयास किया कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। कांग्रेस द्वारा इस कार्यक्रम का क्यूआर कोड जारी करने पर पहले ही दो घंटे में लगभग आठ हजार छात्रों ने इसमें रुचि दिखाई है। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे का दावा है कि तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिलने और युवाओं में उपजे आक्रोश के कारण अब एक लाख से अधिक छात्रों और युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

वैसे, चर्चा यह भी है कि इस राजनीतिक खेल में इंदौर में भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों के नेताओं के अपने-अपने छिपे हुए राजनीति नफा-नुकसान का गणित काम कर रहा है। समझा जा सकता है कि यदि नेहरू स्टेडियम में आसानी से अनुमति मिल जाती, तो शायद भीड़ जुटाना कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के लिए बड़ी चुनौती बन जाती। इंदौर में कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और सांगठनिक कमजोरी से जूझ रही है।

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