नई दिल्ली: ईरान युद्ध को छह महीने पूरे होने वाले हैं। इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई बंद होने के कारण खाड़ी के कई देशों को भारी नुकसान हुआ है। लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान में कतर रहा। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की 20 फीसदी गैस कतर से आती थी। लेकिन उसके एक्सपोर्ट में 96 फीसदी गिरावट आई है और अमेरिका ने कुछ हद तक इसकी भरपाई कर ली है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान युद्ध में कतर आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले देशों में से एक रहा है। आंकड़ों के मुताबिक उसके लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) एक्सपोर्ट में 96% की कमी आई है। सऊदी अरब, यूएई, इराक और कुवैत के तेल एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ा है, लेकिन यह नुकसान कतर जितना नहीं है।
24 अरब डॉलर का नुकसान
अनुमानों के मुताबिक कतर को गैस की बिक्री से करीब 24 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जो देश की लगभग पांच महीने की कमाई के बराबर है। ईरान युद्ध के कारण खाड़ी से निकलने वाले कतर के एलएनजी टैंकरों की संख्या में तेजी से गिरी है। खाड़ी के बाकी देश चुपचाप होर्मुज के जरिए अपना तेल निकालने में कामयाब रहे। लेकिन कतर के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
डेटा इंटेलिजेंस फर्म ICIS के अनुसार कतर ने सिर्फ 18 एलएनजी कार्गो एक्सपोर्ट किए हैं जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 509 थी। कतर के दो टैंकरों पर हमले भी हुए हैं। ईरान युद्ध से पहले दुनिया की रोजाना LNG सप्लाई में कतर की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी थी। हालांकि अमेरिका से होने वाले एक्सपोर्ट ने इसकी कुछ हद तक भरपाई की है।
अमेरिका का फायदा
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने एलएनजी एक्सपोर्ट के 10 समझौते किए हैं। इनके तरह सालाना कुल 7.27 मिलियन टन गैस एक्सपोर्ट की जाएगी। अमेरिका ने एशिया को ज्यादा LNG एक्सपोर्ट की है। नए एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू होने के कारण अमेरिका का कुल LNG एक्सपोर्ट भी बढ़ा है। इस बीच यूरोप में गैस का स्टॉक रेकॉर्ड लो पर पहुंच गया है। इससे सर्दियों में गैस की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।