संजय दत्त की गिरफ्तारी और उसके बाद गैर-कानूनी रूप से हथियार रखने के आरोप में जेल की सजा उनके करियर के सबसे चर्चित विवादों में से एक रही है। हालांकि एक्टर को बाद में आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया गया था, लेकिन उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया और कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने अक्सर अपनी जिंदगी के उस मुश्किल दौर के बारे में बात की है और हाल ही में बताया कि कैसे वे मुश्किल हालात के बावजूद मजबूत बने रहे।
शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ पर बात करते हुए संजय दत्त ने कहा कि जेल में रहने के दौरान अधिकारियों ने उन्हें तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हालात को खुद पर हावी नहीं होने दिया। दर्शकों से बात करते हुए शेखर ने कहा, ‘संजय दत्त को ‘अंडा सेल’ में रखा गया था, फिर भी उन्होंने अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा।’ इसके बाद उन्होंने एक्टर से पूछा, ‘क्या कभी ऐसी स्थितियों में आपको अपनी जान देने का ख्याल आया?’ संजय ने जवाब दिया, ‘कभी नहीं।’
संजय दत्त ने कभी कमजोर महसूस नहीं किया
शेखर सुमन ने आगे कहा कि लोग अक्सर अपनी गलतियां मानने से कतराते हैं, लेकिन संजय दत्त ने अपनी गलती मान ली थी। इसके बाद उन्होंने एक्टर से पूछा, ‘वह कौन-सा पल था जब आपने खुद को सबसे कमजोर महसूस किया?’ संजय ने कहा, ‘मुझे पता था कि मेरे पिता और परिवार ने बहुत मुश्किल हालात का सामना किया है। लेकिन मैंने कभी खुद को कमजोर महसूस नहीं किया।’
पिता सुनील दत्त के सामने पहनाई गई हथकड़ी
जब दर्शकों ने तालियां बजाईं, तो संजय दत्त को वह पल याद आया जब उन्हें पहली बार अपने पिता, एक्टर सुनील दत्त के सामने हथकड़ी पहनाई गई थी। उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘जब पुलिस पहली बार आई और मुझे हथकड़ी पहनाई, तो मेरे पिता सदमे में आ गए। उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने कहा, ‘तुम मेरे बेटे के साथ क्या कर रहे हो?’ मैंने उन्हें कसकर गले लगाया और कहा, ‘आप इन हथकड़ियों से परेशान क्यों हो रहे हैं? ऐसा मत कीजिए। यह बस एक प्रक्रिया है, प्लीज परेशान न हों।’ जबकि असल में, यह मुझे अंदर ही अंदर तोड़ रहा था। लेकिन मुझे उनके लिए मजबूत बने रहना था।’
स्टारडम के बावजूद घमंड नहीं आया
संजय दत्त ने दूसरे अपराधियों के साथ जेल की कोठरी में रहने के दिनों को भी याद किया और कहा कि अपनी स्टारडम या सुविधाओं के बावजूद उन्होंने कभी भी अपने आस-पास के लोगों से खुद को बेहतर नहीं समझा। उन्होंने कहा, ‘देखिए, इतने सालों में भी मुझमें अपने स्टारडम को लेकर कभी कोई घमंड नहीं आया। मुझमें ऐसी कोई बात नहीं है।’
कई बार सेट पर नीचे बैठकर खाया
एक्टर ने अपनी जिंदगी के नजरिए को आकार देने का श्रेय अपने माता-पिता के उस फैसले को दिया, जिसके तहत उन्हें ‘द लॉरेंस स्कूल, सनावर’ भेजा गया था। उन्होंने कहा, ‘कई बार हम सेट पर जमीन पर बैठकर खाना खाते थे। मैंने कई बार सेट पर काम करने वाले लोगों के साथ बैठकर खाना खाया है। मुझे इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता।’
जेल के अधिकारियों ने तोड़ने की कोशिश की
संजय दत्त के मुताबिक, अधिकारियों को लगता था कि उनकी सेलिब्रिटी वाली सुख-सुविधाएं छीन लेने से वे टूट जाएंगे। उन्होंने याद करते हुए कहा, लेकिन मेरा कुछ नहीं बिगड़ा। क्योंकि मैं टूटा नहीं। वे हैरान रह गए। उनकी तो हवा ही निकल गई। उन्होंने मेरा मजाक उड़ाया। उनमें से एक मेरे पास आया और बोला, ‘तुम्हें यहां सिगरेट नहीं मिलेगी। अब क्या करोगे?’ तो मेरा जवाब था, ‘सर, यहां बीड़ी तो मिल जाएगी।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘इन सभी बदलावों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा, इसलिए वे परेशान हो गए कि वह इतना जमीन से जुड़ा और बेअसर कैसे है।’