पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की वोटिंग प्रक्रिया समाप्त हो गई है। काफी कम मतदान भी हुआ। लेकिन यह उपचुनाव सिर्फ जीत और हार दर्ज करने के लिए ही नहीं जाना जाएगा। यह चुनाव इसलिए भी याद किया जाएगा क्योंकि जन सुराज के नायक प्रशांत किशोर के चुनावी गुब्बारे की हवा किसने निकाली? क्या दूसरे -तीसरे स्थान की जंग ने बीजेपी को नुकसान कम फायदा ज्यादा पहुंचाया? ऐसे कई सवाल के जवाब 3 अगस्त को मिल जाएंगे। चलिए जानते हैं कि चुनाव की दिशा कोई नई राह पकड़ती है या फिर त्रिकोणात्मक संघर्ष के रास्ते पुराने रंग ही दिखने जा रहे हैं।
बीजेपी और पीके की सीधी टक्कर होते होते रह गई
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को दो फेज में बांटे तो पहला फेज बीजेपी और जनसुराज के आमने सामने का रहा। इस सीधी टक्कर में चुनाव एनडीए के चाहने वाले या नहीं चाहने वालों के बीच होते दिख रही थी। इस खास समय में यह भी लगने लगा कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव व्यवस्था के पक्ष और व्यवस्था को बदलने की इच्छा रखने वालों के बीच है। यह इसलिए क्योंकि राजद के ‘युवराज’ तेजस्वी यादव ने चुनाव से दूरी रख कर इस माहौल को ‘सींचने’ का काम किया।
बांकीपुर का वोटिंग ‘चरित्र’
पिछले तीन विधानसभा चुनाव की बात करें तो महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधी टक्कर हुई। वोट पोल भी औसतन 40 प्रतिशत रहा। दलित वोट की बात करें तो एनडीए के उम्मीदवार को वोट पोल का 59 से 62 वोट मिला और महागठबंधन के उम्मीदवार को 39 से 42 प्रतिशत वोट मिला।यह वोट प्रतिशत यह दर्शाता है कि कितने प्रतिशत बीजेपी को या कितने प्रतिशत राजद या कांग्रेस के उम्मीदवार को चाहते हैं, पर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एक नया चुनावी माहौल बना।
इस लड़ाई का एक तीसरा कोण यह बना कि ऐसे वोटर जो न तो भाजपा और न ही राजद को चाहते हैं, वो जन सुराज की ओर जाने लगे। पर अंतिम समय में तेजस्वी यादव ने आक्रामक बैटिंग कर त्रिकोणीय जंग में बदल गया। अब तक बांकीपुर का चुनाव जो व्यवस्था के साथ और व्यवस्था के विरुद्ध था। लेकिन तेजस्वी यादव के उतरने से जन सुराज और राजद के बीच मुख्य विपक्ष बनने की जंग शुरू हो गई
जीत हार के फैक्टर
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की सीधी लड़ाई में यह माना जा रहा था कि सभी जाति और धर्म के वोटर जो बदलाव चाहते थे, वे प्रशांत किशोर के साथ हैं। इसमें ज्यादा बड़ा हिस्सा युवाओं का था। सीधी टक्कर का एक लाभ जन सुराज का यह मिल रहा था कि राजद का M Y जन सुराज के साथ था। और यह बहुत बड़ा आधार वोट। यानी बांकीपुर का 22 से 24 प्रतिशत वोट। पर चुनाव के आखिरी समय में जबरदस्त रोड शो कर ऊहा पोह की स्थिति पैदा कर दी।
अब चुनाव फैक्टर में जीत हार के समीकरण को लेकर कहा जा रहा है कि…
1. एन डी ए अपने आधार वोट और अतिपिछड़ा के साथ दलित वोट को साध लेती है तो एज भाजपा के उम्मीदवार को मिल सकता है।
2.जन सुराज के उम्मीदवार अगर राजद के M Y समीकरण पर अधिपत्य जमा लेते हैं और सवर्ण वोट में अच्छी सेंधमारी कर लेती है तो जनसुराज को ऐज मिल सकता है
3. राजद अगर अपनी जमानत बचा ले जाता है। यानी कुल वोट पोल का 16 प्रतिशत ले आता है तो भी बीजेपी को एज मिल सकता है।