अकरा: भारतीय कूटनीति अब ग्लोबल साउथ में अपनी पकड़ को और ज्यादा धार देने में जुट गई है। ग्लोबल साउथ में सीधा मुकाबला चीन से है जो खुद को लीडर बताता है जबकि भारत खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज बताता है। अपने महत्वपूर्ण अफ्रीका दौरे के पहले चरण में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाया है।
घाना प्राकृतिक संसाधनों अटा पड़ा है और यहां सोना, पेट्रोलियम और लीथियम जैसे बहुमूल्य खनीजों का अकूत भंडार है। इसीलिए अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध घाना के साथ भारत के ये बढ़ते कदम न सिर्फ व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई दे रहे हैं बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव का भी स्पष्ट संदेश दे रहे हैं। दरअसल विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को अपने तीन देशों के अफ्रीकी दौरे के पहले चरण में घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने भारत-घाना संबंधों में आ रही तेजी पर चर्चा की।
भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है घाना?
- घाना में कई तरह के प्राकृतिक संसाधन हैं जिनमें मुख्य खनिज भंडार पेट्रोलियम और खेती के लिए उपजाऊ जमीन शामिल हैं।
- घाना अफ्रीका में सोना पैदा करने वाले प्रमुख देशों में से एक है। देश के खनिज निर्यात में सोने का हिस्सा सबसे ज्यादा है।
- समुद्र तट के पास से कमर्शियल तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन सरकार के लिए जरूरी कमाई और ऊर्जा की सप्लाई का जरिया है।
- घाना मैंगनीज, बॉक्साइट और हीरे जैसे खनिजों का उत्पादन और निर्यात करता है साथ ही लिथियम में भी दिलचस्पी बढ़ रही है।
- समुद्री नमक, निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले पत्थर, रेत और बजरी की भरपूर सप्लाई घरेलू इस्तेमाल और क्षेत्रीय व्यापार में मदद करती है।
- भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से महामा को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की घाना की ऐतिहासिक यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति पर चर्चा की। यह प्रधानमंत्री की उस देश की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। घाना के साथ भारत के बन रहे मजबूत संबंध से चीन बिल्कुल खुश नहीं होगा क्योंकि वो लगातार इन देशों से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता रहा है।
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उन्होंने कहा ‘हमने पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद भारत-घाना साझेदारी में आई तेजी के बारे में बात की। हम घाना के विकास के लिए राष्ट्रपति महामा की सोच और विभिन्न क्षेत्रों में हमारी व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रति उनके सकारात्मक नजरिए की सराहना करते हैं।’ अफ्रीका के साथ भारत के रिश्ते में नया अध्याय
जयशंकर मंगलवार को घाना पहुंचे। यह उनके तीन अफ्रीकी देशों के दौरे का पहला चरण है जिसका मकसद व्यापार, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में आपसी संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर बातचीत करना है। घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्ज़ेटो अब्लाक्वा ने विदेश मंत्री का स्वागत किया। उन्होंने जयशंकर को ‘घाना का बहुत अच्छा दोस्त’ बताया और कहा कि वह ‘सकारात्मक बातचीत और असरदार समझौतों’ के लिए उत्सुक हैं।
घाना के बाद जयशंकर कोटे डी आइवर और इथियोपिया जाएंगे। अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और दोस्ती और सहयोग के करीबी रिश्तों की समीक्षा करने के लिए तीनों देशों के नेताओं से मिलेंगे। वह आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।