न्यूयॉर्क: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र में बेहद दमदार भाषण दिया है। उन्होंने दुनिया के सबसे मंच पर वैश्विक ताकतों को आइना दिखाते हुए कहा ‘हम उस जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे हैं जिसे हमने पैदा नहीं किया और उन युद्धों का भी शिकार हो रहे हैं जिन्हें हमने शुरू नहीं किया।’ इस साल प्रधानमंत्री बने बालेन शाह का यूएनजीए में ये पहला भाषण था लेकिन उनके भाषण के दौरान जमकर तालियां बजी हैं। उनका ये भाषण भोटेकोशी-त्रिशूली में आई विनाशकारी बाढ़ के एक महीने बाद हुआ जिसमें कम से कम 1400 लोगों की मौत हुई और 6000 लोग लापता हैं।
उन्होंने दमदार तरीके से अपनी बात रखते हुए कहा ‘हमने एक ऐसी दुनिया बनाई है जहां युद्ध के लिए तो लॉजिस्टिक्स की एकदम सही तरीके से समय पर सप्लाई होती है लेकिन खाने-पीने की चीजों के लिए लॉजिस्टिक्स का सिस्टम टूटा हुआ है।’ उन्होंने कहा ‘यह सिर्फ नेपाल की निजी मुसीबत नहीं है। बांग्लादेश से पूछिए। भूटान से पूछिए। भारत से पूछिए। मालदीव से पूछिए। पाकिस्तान से पूछिए। श्रीलंका से पूछिए।’
नेपाल के PM बालेन शाह के दमदार भाषण की 5 बड़ी बातें
1- नेपाल में आई बाढ़ दुनिया के लिए चेतावनी- बालेन शाह ने अपने भाषण की शुरूआत नेपाल में पिछले महीने आई भीषण बाढ़ से की और बताया कि इसमें 400 लोग मारे गये हैं और 6 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जलवायु में हो रही गर्मी हिमालय को और कमजोर बना रही है जिससे बर्फ और चट्टानों के खिसकने , बाढ़, भूस्खलन और एक के बाद एक आने वाली दूसरी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। उनका मुख्य संदेश यह था कि जलवायु परिवर्तन पहले से ही नेपाल में विकास कार्यों में बाधा डाल रहा है।
2- हिमालय से जुड़ी चेतावनियां साझा करने के लिए एक प्रस्तावित सिस्टम- बालेन शाह ने नेपाल, भारत और चीन को शामिल करते हुए ‘हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म’ बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस तंत्र के जरिए देश सैटेलाइट डेटा और विशेषज्ञता साझा कर सकें, खतरनाक ग्लेशियल झीलों की निगरानी कर सकें, शुरुआती चेतावनी सिस्टम को मजबूत कर सकें और सीमाओं के पार आपदा सहायता में तालमेल बिठा सकें।
3- जलवायु परिवर्तन के लिए मिले मदद- बालेन शाह ने इस दौरान दुनिया के देशों से जलवायु परिवर्तन के लिए मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्लोबल गवर्नेंस की नाकामियों की वजह से और गंभीर हुए संकट से निपटने की क्षमता नेपाल सिर्फ कर्ज लेकर नहीं बना सकता। उन्होंने ‘लॉस एंड डैमेज फंड’, ‘ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी’ और क्लाइमेट फाइनेंसिंग के दूसरे तरीकों को नाकाफी बताया और कहा कि आपदाओं के बाद मदद पाने के लिए कमजोर देशों को मुश्किल प्रक्रियाओं से गुजरना नहीं पड़ना चाहिए।
5- युवा कर रहे नतीजे देने वाले सिस्टम की मांग- इसके अलावा बालेन शाह ने नेपाल में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव को ज्यादा ईमानदारी और जवाबदेही की व्यापक पीढ़ीगत मांग का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का मकसद एक ऐसा सिस्टम बनाना है जो देश के अंदर ही नौकरियां, सामाजिक सुरक्षा और मौके दे। जलवायु आपदाओं के मामले में उन्होंने तात्कालिक प्रतिक्रिया के बजाय तैयारी पर जोर दिया।